Pre Marriage Relationship- शादी से पहले अजनबी होते हैं लड़का-लड़की, बरतें सावधानी: दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
यह पूरा मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा है जिसकी मुलाकात आरोपी व्यक्ति से साल 2022 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी। आरोप है कि व्यक्ति ने महिला को शादी का झांसा दिया और दिल्ली से लेकर दुबई तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, महिला का आरोप है कि आरोपी ने दुबई में उसके निजी वीडियो भी बना लिए और बाद में उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसे डराने लगा। महिला के पैरों तले जमीन तब खिसक गई, जब उसे पता चला कि आरोपी ने 19 जनवरी 2024 को पंजाब में किसी दूसरी महिला से शादी कर ली है।

Pre Marriage Relationship/दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने के एक मामले में सुनवाई करते हुए बेहद महत्वपूर्ण और सामाजिक संदेश देने वाली टिप्पणी की है।
न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जवल भुइयां की पीठ ने सोमवार को एक व्यक्ति की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं को आगाह करते हुए कहा कि शादी से पहले लड़का और लड़की एक-दूसरे के लिए अजनबी होते हैं, इसलिए शारीरिक संबंध बनाने से पहले अत्यधिक सावधानी और सतर्कता बरतनी चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि विवाह जैसी गंभीर संस्था से पहले अंधाधुंध भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।
यह पूरा मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा है जिसकी मुलाकात आरोपी व्यक्ति से साल 2022 में एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी। आरोप है कि व्यक्ति ने महिला को शादी का झांसा दिया और दिल्ली से लेकर दुबई तक उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। इतना ही नहीं, महिला का आरोप है कि आरोपी ने दुबई में उसके निजी वीडियो भी बना लिए और बाद में उन्हें वायरल करने की धमकी देकर उसे डराने लगा। महिला के पैरों तले जमीन तब खिसक गई, जब उसे पता चला कि आरोपी ने 19 जनवरी 2024 को पंजाब में किसी दूसरी महिला से शादी कर ली है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब आरोपी ने जमानत के लिए निचली अदालत और हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो उसकी अर्जी खारिज कर दी गई थी।
अदालतों का मानना था कि आरोपी ने शुरू से ही शादी का झूठा वादा किया था, क्योंकि वह पहले से ही दूसरी शादी की तैयारी में था। अब जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना ने सुनवाई के दौरान कहा, “शायद हम पुराने ख्यालों के हैं, लेकिन शादी से पहले किसी पर भी आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए।” कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अगर महिला शादी को लेकर गंभीर थी, तो उसे इस तरह दुबई नहीं जाना चाहिए था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक व्यावहारिक नजरिया अपनाते हुए कहा कि जब संबंध दोनों पक्षों की आपसी सहमति से बने हों, तो हर मामले को सीधे सजा या कड़े ट्रायल के लिए नहीं भेजा जाना चाहिए।
पीठ ने आरोपी को सुझाव दिया कि वह पीड़ित महिला को मुआवजा देने पर विचार करे। अदालत ने दोनों पक्षों के वकीलों को आपस में बात कर समझौते की संभावना तलाशने का निर्देश दिया है। कोर्ट का मानना है कि ऐसे संवेदनशील मामलों में कानूनी लड़ाई के साथ-साथ समाधान के अन्य रास्तों पर भी विचार किया जाना चाहिए।
इस मामले की अगली सुनवाई अब बुधवार को होनी है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी ने एक बार फिर ‘शादी के वादे’ और ‘सहमति से बने संबंधों’ के बीच की कानूनी रेखा पर नई बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का यह बयान आज के दौर के युवाओं के लिए एक बड़ी सीख है, जो सोशल मीडिया या मैट्रिमोनियल साइट्स के जरिए अजनबियों पर जल्दी भरोसा कर लेते हैं।





