खून के रिश्तों में ‘सुपारी’ का जहर—भाई ने ही रच दी हत्या की साजिश, CCTV से खुला राज
गायब हुआ भाई, जमीन निकली वजह… ‘त्रिनयन’ की नजर से बच न सके 15 चेहरे

मुंगेली…जिले में सेवानिवृत्त लेखापाल दामोदर सिंह राजपूत की अंधे कत्ल की गुत्थी को मुंगेली पुलिस ने सुलझाते हुए एक ऐसे सनसनीखेज सच का खुलासा किया है, जिसने रिश्तों की बुनियाद को ही सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। इस पूरे हत्याकांड में बाहरी नहीं, बल्कि मृतक के अपने सगे भाई, रिश्तेदार और परिचित ही मास्टरमाइंड निकले। पुलिस ने इस मामले में 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि 4 विधि से संघर्षरत बालकों को भी पकड़कर विधिसम्मत कार्रवाई की गई है।
इस पूरे मामले की जांच पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग के निर्देशन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल के मार्गदर्शन में की गई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नवनीत कौर छाबड़ा और उप पुलिस अधीक्षक हरविंदर सिंह के नेतृत्व में साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक प्रसाद सिन्हा, थाना प्रभारी लोरमी निरीक्षक अखिलेश वैष्णव, थाना प्रभारी लालपुर उपनिरीक्षक सुंदरलाल गोरले, थाना प्रभारी जरहागांव उपनिरीक्षक सतेंद्रपुरी गोस्वामी सहित पुलिस टीम ने तकनीकी और मैदानी जांच के जरिए इस जटिल मामले का खुलासा किया।
दरअसल 21 मार्च 2026 को दामोदर सिंह राजपूत, जो शिक्षा विभाग में सेवानिवृत्त लेखापाल , उम्र करीब 62 वर्ष ।अपने घर से निकले थे लेकिन वापस नहीं लौटे। 22 मार्च को उनके भाई बलबीर सिंह ने थाना लालपुर में रिपोर्ट दर्ज कराई कि दामोदर घर नहीं पहुंचे हैं और उनकी मोटरसाइकिल मनोहरपुर राइस मिल के पास सुनसान रास्ते में पड़ी मिली है। इस पर पुलिस ने गुम इंसान कायम कर जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस ने ‘त्रिनयन एप’ और जिलेभर के CCTV कैमरों की मदद से मृतक की आखिरी लोकेशन और मूवमेंट खंगाले। इसी दौरान एक स्लेटी रंग की हुण्डई ईऑन कार क्रमांक CG 10 AC 8986 मृतक के पीछे-पीछे चलती दिखाई दी। कार के रजिस्ट्रेशन से पता चला कि वह ग्राम झझपुरी के देवचरण साहू के नाम पर है, जिसने पूछताछ में बताया कि यह कार संजय यादव निवासी झाफल को किराये पर दी गई थी।
संजय यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो पूरे मामले का खुलासा हो गया। उसने बताया कि दामोदर सिंह की हत्या के लिए उसे और उसके साथियों को 10 लाख रुपये और 50 डिसमिल जमीन की सुपारी दी गई थी। यह सुपारी मृतक के छोटे भाई रणजीत उर्फ मुन्ना राजपूत, उसके साले पालेश्वर सिंह राजपूत और चचेरे भाई रामपाल सिंह राजपूत ने मिलकर दी थी।
योजना के मुताबिक 21 मार्च को आरोपियों ने दामोदर सिंह को झाफल गांव आने का निमंत्रण दिलवाया और रास्ते में मनोहरपुर के सुनसान इलाके में उनकी गाड़ी रुकवाकर संजय यादव, श्रवण उर्फ प्रिंस गोई, योगेश गंधर्व उर्फ योगेश्वर और एक नाबालिग ने गमछे से गला घोंटकर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद शव को ईऑन कार में डालकर ले जाया गया, लेकिन रास्ते में कार खराब हो गई, जिसके बाद देवराज साहू उर्फ दद्दू उर्फ देवकुमार की मदद से टाटा स्पेशियो गोल्ड कार मंगाकर शव को उसमें शिफ्ट किया गया और कवर्धा जिले के पंडरिया थाना क्षेत्र के देवसरा गांव के जंगल में नदी किनारे गड्ढे में दफना दिया गया।
हत्या के बाद शक से बचने के लिए आरोपियों ने एक और साजिश रची। मृतक का मोबाइल प्रयागराज ले जाकर गंगा नदी में फेंक दिया गया, ताकि यह लगे कि वह साधु बनने वहां चला गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरी साजिश की जड़ करोड़ों की संपत्ति थी। मृतक दामोदर राजपूत के पास करीब 4 करोड़ रुपये की जमीन और 30 तोला सोना था। उनके भाई और रिश्तेदार इस संपत्ति पर कब्जा करना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने पहले से ही फर्जी नोटरी वचनपत्र तैयार कराया, जिसमें मृतक द्वारा अपनी संपत्ति बेटे को न देकर भाई-भतीजों के नाम करने की बात लिखी गई थी। इस वचनपत्र में गवाहों के हस्ताक्षर तक नहीं थे, जिससे साजिश का संदेह और गहरा हो गया।
जांच में पारिवारिक विवाद का पहलू भी सामने आया। मृतक और उनके बेटे संजय राजपूत के बीच पहले से विवाद चल रहा था और दोनों के बीच बातचीत बंद थी। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने बाप-बेटे के बीच दुश्मनी को और बढ़ाया और बेटे को ही शक के दायरे में लाने की योजना बनाई।
पूरे मामले में पुलिस ने रणजीत सिंह राजपूत, पालेश्वर राजपूत, रामपाल सिंह राजपूत, पराग सिंह राजपूत, हेमंत राजपूत, अजय राजपूत, संजय यादव, श्रवण उर्फ प्रिंस गोई, योगेश गंधर्व उर्फ योगेश्वर, देवराज साहू उर्फ दद्दू उर्फ देवकुमार और आशीष कारीकांत उर्फ धर्मेन्द्र उर्फ बाबू को गिरफ्तार किया है। इसके अलावा 4 नाबालिगों को भी हिरासत में लेकर बाल संप्रेषण गृह भेजा गया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सुपारी की रकम 96 हजार रुपये नगद, घटना में प्रयुक्त हुण्डई ईऑन कार, टाटा स्पेशियो गोल्ड कार, एक मोटरसाइकिल और एक स्कूटी जब्त की है। थाना लालपुर में आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं 61(2), 103(1), 140(2) और 238 के तहत मामला दर्ज कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा गया है।
कार्रवाई में साइबर सेल और थाना स्तर की टीम के अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तकनीकी विश्लेषण और लगातार फील्ड वर्क के जरिए इस अंधे कत्ल की परत दर परत सच्चाई सामने लाई।





