कुनकुरी की आशा ने रचा परचम—12वीं में तीसरा स्थान, अब डॉक्टर बनकर गांवों में सेवा करेगी..लिया संकल्प
बिलासपुर में रहकर NEET की तैयारी; सफलता के साथ समाज सेवा का बड़ा सपना

बिलासपुर/जशपुर….मेहनत, अनुशासन और स्पष्ट लक्ष्य—इन तीन शब्दों ने जशपुर जिले के कुनकुरी की बेटी आशा यादव को उस मुकाम तक पहुंचाया है, जहां हर अभिभावक अपने बच्चों को देखना चाहता है। छत्तीसगढ़ व्यावसायिक परीक्षा मंडल द्वारा घोषित कक्षा 12वीं के परिणाम में आशा यादव ने तीसरा स्थान हासिल कर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे सरगुजा संभाग और प्रदेश का नाम रोशन किया है।
बेटियों का दबदबा कायम, आशा बनी प्रेरणा
इस वर्ष भी परीक्षा परिणाम में बेटियों का प्रदर्शन चर्चा में है। टॉप सूची में उनका वर्चस्व साफ दिखा। इसी क्रम में आशा यादव की उपलब्धि खास बनती है, जिन्होंने सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए यह मुकाम हासिल किया। यह सफलता सिर्फ अंक नहीं, बल्कि उस निरंतर मेहनत का परिणाम है, जिसे उन्होंने वर्षों तक बिना किसी शोर के जारी रखा।
कुनकुरी से बिलासपुर तक—सपनों का सफर
फिलहाल आशा बिलासपुर में रहकर NEET परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने इसे अपनी कमजोरी नहीं, ताकत बनाया। नियमित अध्ययन, समय का सटीक प्रबंधन और लक्ष्य पर फोकस—यही उनकी सफलता की कुंजी रही।
सिर्फ करियर नहीं, सेवा का संकल्प
आशा का सपना केवल डॉक्टर बनना नहीं है। उनका लक्ष्य है कि गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचें और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त इलाज मिल सके। यही सोच उन्हें बाकी सफल छात्रों से अलग बनाती है—जहां उपलब्धि के साथ जिम्मेदारी का भाव भी जुड़ा है।
अभिभावकों और विद्यार्थियों के लिए संदेश
आशा की सफलता यह बताती है कि संसाधनों की कमी बाधा नहीं बनती, अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत निरंतर। आज के विद्यार्थियों के लिए यह उदाहरण है कि मोबाइल और भटकाव से दूर रहकर अगर समय का सही उपयोग किया जाए, तो कोई भी लक्ष्य दूर नहीं।
गर्व का क्षण, प्रेरणा का अवसर
कुनकुरी की इस बेटी ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहर और गांव भी बड़े सपनों की उड़ान का आधार बन सकते हैं। आशा यादव की यह सफलता न केवल जशपुर या सरगुजा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है—और हर उस बच्चे के लिए प्रेरणा, जो अपने सपनों को सच करना चाहता है।





