KCC Scam-सहकारी बैंक में केसीसी घोटाला.. किसानों के नाम पर निकाल लिए 200 करोड़ रुपये, ऐसे हुआ सफेदपोश ठगी का सनसनीखेज खुलासा

KCC Scam/भिलाई/छत्तीसगढ़ के सहकारी बैंकों में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के नाम पर एक बहुत बड़े वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। अब तक की सरकारी जांच में 150 करोड़ रुपये से अधिक के गबन की पुष्टि हो चुकी है, जबकि आशंका जताई जा रही है कि यह आंकड़ा 200 करोड़ रुपये के पार जा सकता है।
इस महाघोटाले ने बैंकिंग व्यवस्था और सहकारी समितियों के बीच के गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है, जहां बैंक अधिकारियों और समिति प्रबंधकों ने मिलकर उन मासूम किसानों को निशाना बनाया जिनकी आड़ में करोड़ों की सरकारी राशि डकार ली गई।
इस पूरे घोटाले की कार्यप्रणाली बेहद शातिर और संगठित थी। ठगों ने मुख्य रूप से उन किसानों की पहचान की जो या तो अनपढ़ थे या फिर कभी बैंक से लोन नहीं लेते थे। घोटाले को अंजाम देने के लिए ऐसे किसानों की ऋण पुस्तिकाओं और निजी जानकारियों का इस्तेमाल कर फर्जी लोन आवेदन तैयार किए गए।
जांच में पाया गया कि किसानों के मोबाइल नंबर जानबूझकर बदल दिए गए थे ताकि बैंक से होने वाले किसी भी ट्रांजैक्शन का मैसेज उन तक न पहुंच सके। लोन स्वीकृत होते ही राशि को पहले समिति के खातों में भेजा गया और फिर बैंक अफसरों की मिलीभगत से इसे किसान के बचत खाते और फिर ‘म्यूल’ खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। अंत में फर्जी बाउचरों के जरिए पूरी रकम नकद निकाल ली गई।
घोटाले की जड़ें प्रदेश के कई जिलों में फैली हुई हैं। भिलाई और सारंगढ़ की शाखाओं में जालसाजी के कई मामले पहले ही सामने आ चुके हैं, वहीं अब अंबिकापुर शाखा में भी लगभग 50 करोड़ रुपये के गबन की शिकायत मिली है।
इस खेल के पीछे की मुख्य वजह राजनीतिक लोकलुभावन वादे और कर्ज माफी की योजनाएं बताई जा रही हैं। अफसरों और समितियों को यह भरोसा था कि चुनाव के समय जब सरकारें कर्ज माफ करेंगी, तो किसानों को कभी पता ही नहीं चलेगा कि उनके नाम पर कोई फर्जी लोन भी लिया गया था। वर्ष 2018 की कर्ज माफी के बाद से इस तरह की गतिविधियों में तेजी आने की बात सामने आई है।
मामले का बड़ा खुलासा तब हुआ जब अपेक्स बैंक के प्रधान कार्यालय को बरमकेला ब्लॉक की शाखा में गड़बड़ी की सूचना मिली। जांच के लिए भेजी गई तीन सदस्यीय टीम ने पहले ही दिन दो किसानों के खातों से संदिग्ध तरीके से पैसे ट्रांसफर होने के सुराग पकड़े।
जब उन किसानों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने किसी भी तरह का लोन लेने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद जब जांच का दायरा बढ़ा तो बरमकेला, बोंदा, दुलोपाली और लंध्रा समेत कुल 17 समितियों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं। दिसंबर 2025 में हुए खुलासे के अनुसार, विभिन्न शाखाओं के लगभग 887 खातों से करीब 10 करोड़ रुपये अवैध रूप से निकाले गए थे।
अपेक्स बैंक के अध्यक्ष केदारनाथ गुप्ता ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि यह घोटाला काफी लंबा और गहरा है जिसकी जांच लगातार जारी है। उन्होंने बताया कि किसानों के नाम पर लिए गए फर्जी लोन की सूची अब सोसायटियों में चस्पा की जा रही है ताकि वास्तविक किसान अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें। प्रशासन अब तक लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये की रिकवरी करने में सफल रहा है। बैंक प्रबंधन ने पिछले तीन वर्षों के रिकॉर्ड की विस्तृत ऑडिट के आदेश दिए हैं




