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Bilaspur

डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा के सुरता: म साहित्यकार मन के सम्मान अउ पुस्तक के विमोचन,17 मई के ‘समन्वय परिवार के आयोजन’

बिलासपुर । छत्तीसगढ़ी संस्कृति के ध्वजवाहक अऊ छत्तीसगढ़ी गद्य साहित्य के युग प्रवर्तक, कीर्तिशेष डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा के 98वीं जयंती के पावन अवसर म, आइतवार 17 मई आज के दिन न्यायधानी बिलासपुर म एक ठन भव्य बौद्धिक- सांस्कृतिक मेला के आयोजन होवत हे। ‘समन्वय परिवार’ के डाहर ले आयोजित ये गरिमामय कार्यक्रम छत्तीसगढ़ के कला, साहित्य अऊ हमर पुरखौती परंपरा ल समर्पित रही। ए समारोह म समूचा छत्तीसगढ़ ले नामी-गिरामी विद्वान अऊ बुद्धिजीवी मन जुरियाही अऊ छत्तीसगढ़ी अस्मिता के ए अनन्य उपासक ल अपन श्रद्धा-सुमन अरपित करहीं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष श्री प्रभात मिश्रा रइहीं। कार्यक्रम के अध्यक्षता पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के साहित्य अउ भाषा अध्ययनशाला के पहिली प्रोफेसर अउ अध्यक्ष ‘डॉ. चित्तरंजन कर’ ह करहीं।”

विशिष्ट अतिथि के रूप म पाणिनीय शोध संस्थान बिलासपुर के अध्यक्षा डॉ. पुष्पा दीक्षित, छत्तीसगढ़ विधानसभा के सचिव श्री दिनेश शर्मा, खैरागढ़ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. राजन यादव, पूर्व विधायक श्री चंद्रप्रकाश बाजपेयी अऊ जानमाने कवि डॉ. अजय पाठक शामिल होही।

ये सब्बो किताब मन के लोकार्पण होही: छत्तीसगढ़ के इतिहास अऊ परंपरा: डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा, गुड़ी के गोठ: डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा, कीर्तिशेष डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा: संपादक – डॉ. देवधर महंत, रात जागा पाखी उवाच: सरला शर्मा, महाभारत काल म नारी: डॉ. बरसाइत दास महंत। ये सब्बो किताब मन सर्वप्रिय प्रकाशन (रायपुर-दिल्ली) ले छपे हें।

ये सब्बो झन ल कार्यक्रम म ‘आत्मीय सारस्वत सम्मान’ देय जाही: श्री बसंत राघव साहित्यकार (रायगढ़), डॉ. जयश्री शुक्ला प्रोफेसर (बिलासपुर), श्री बजरंग केडिया, पं. गिरधर शर्मा साहित्यकार संपादक (बिलासपुर), श्री राजेश चौहान साहित्यकार (रायपुर), स्मृतिशेष प्रेमशंकर पाटनवार के परिवार, स्मृतिशेष सुभाष वर्मा के परिवार, सेन्ट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (गोंडपारा, बिलासपुर)

डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा , कृष्णा शर्मा अऊ पं. लक्ष्मी नारायण शर्मा ‘साधक’ के याद म घलो सम्मान दिय जाही। जेमां श्री विजय मिश्रा ‘अमित’, श्री महेन्द्र जैन, डॉ. उषा किरण बाजपेयी, श्री दिनेश कुमार चतुर्वेदी, सरला शर्मा, शशि दुबे, डॉ. बेला महंत, सुश्री श्रुति प्रभला, श्री ब्रजेश श्रीवास्तव अऊ श्री किशोर सेतपाल के नाव सामिल हे।

डॉ पालेश्वर प्रसाद शर्मा : परिचय: डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा के जनम 01 मई 1928 के होय रिहिस अऊ 02 जनवरी 2016 के उनकर सरगवास (निधन) हो गे रिहिस। उनकर जिनगी बहुते परकार के काम मन ले भरे रिहिस।

शर्मा जी ह सिरिफ लोकभाषा छत्तीसगढ़ी ल सहित्य के मुख्य धारा म नइ लाय रिहिन, बल्कि ओला मान- सम्मान अऊ गहिर बिचार घलो दे रिहिन। आजादी के लड़ाई ले लेके एक बड़े शिक्षाविद अऊ साहित्यकार बने तक के उनकर डगर, देस अऊ भाखा बर उनकर मया अऊ त्याग के बड़े मिसाल रिहिस।

बहुआयामी जीवन : आजादी के लड़ाई ले के साहित्य साधना तक सफर: डॉ. शर्मा ह सिरिफ 14 साल के उमर म 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ म कूद गे रहिन।
उमन बचपन ले ही अपन देश प्रेम ला सबो के आगू देखा दे रहिन। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ म जुड़े के सेती उनकर मन म अनुशासन अऊ राष्ट्रवाद के भावना ह मन मा बसगे रहिस। उनकर लेखन म देश भक्ति अऊ लोक संस्कृति के सुंदर मेल दिखथें।

छत्तीसगढ़ी साहित्य के झंडा धरईया:
डॉ. शर्मा हिंदी अऊ छत्तीसगढ़ी दुनो म बरोबर लिखिन, पर छत्तीसगढ़ी ल सशक्त गद्य के रूप म खड़ा करइया म उनकर योगदान बड़का हे। अपन लेखन के सुरुवात उन ‘गद्यगीत’ ले करिन, जेमां उनकर भाव अऊ मर्म दिखथे।

उनकर शोध प्रबंध ‘छत्तीसगढ़ के कृषक जीवन के शब्दावली’, छत्तीसगढ़ी के शब्दकोश अऊ गाँव-गाँव के जीवन ल समझे बर एक ठन मील के पत्थर हे। एही ले पता चलथे कि ओ सिरिफ लेखक नइ रहिन, लोक संस्कृति के गहरा जानकार घलो रहिन।

गद्य म नवा राह : 1958 म : ‘नाव के नेह म’ जइसे लोककथा लिख के उन साबित कर दे रहिन कि छत्तीसगढ़ी सिरिफ लोकगीत तक सीमित नइ हे, बल्कि इहाँ सशक्त गद्य घलो लिखे जा सकथे।

जब उनकर कहानी ‘तिरिया जनम झनि देय’ धर्मयुग के दीपावली अंक म छपिस, त ओ छत्तीसगढ़ी साहित्य बर एक ठन बड़का गौरव बन गे। ए कहानी समाज के बुराई म जोरदार चोट करथे।

साहित्य म उनकर बड़का योगदान रहिस, जेकर गवाह ये बात मन हें: उन ह 20 ले जादा मौलिक अऊ संपादित किताब लिखिन।आकाशवाणी ले उनकर 150 ले जादा रचना मन प्रसारित होइन।
दैनिक भास्कर अऊ नवभारत जइसे अखबार म उन ह लगातार लिखत रहिन। छत्तीसगढ़ी लोक कथा मन ल सहेज के नवा रूप दे म उनकर बड़का हाथ रहिस।

मुख्य सम्मान अऊ उपलब्दी: साहित्य जगत उनकर काम ल भर भर के सराहिस: पं. सुंदरलाल शर्मा सम्मान 2005, विद्याधर कवि सम्मान 2003, साधना सम्मान 2005, वयोश्रेष्ठ सम्मान 2009, समन्वय रत्न सम्मान 1997, वागीश्वरी पुरस्कार, छत्तीसगढ़ अस्मिता पुरस्कार आदि।

डॉ. पालेश्वर प्रसाद शर्मा सिरिफ एकझन लेखक नइ रहिन। ओमन छत्तीसगढ़ी भाखा के बड़का सुपना देखइय्या साहित्यकार रहिन।ओमन हमर भाखा ल सिरिफ गीत तक सीमित नइ रखिन, बल्कि गद्य (कहानी-किस्सा) म घलो बड़का पहिचान दिलवाइस। उनकर पूरा जिनगी देस सेवा, पढ़ई-लिखई अऊ सहित्य बर अरपित रहिस। ओमन छत्तीसगढ़ी सहित्य के अइसन धारनखंभा बनिन, जेन आने वाला पीढ़ी ल भाखा ले मया करे बर हमेशा रद्दा देखाहीं।

कार्यक्रम के बेरा अऊ ठउर: बेरा: दुपहर 2 बजे ले साँझ 6 बजे तक
ठउर: प्रार्थना भवन, जल संसाधन विभाग परिसर, आई.जी. कार्यालय के लगे, बिलासपुर

आयोजक डॉ. गंगाधर पटेल ‘पुष्कर’, अनन्य शर्मा अऊ डॉ. देवधर महंत ह सबो साहित्य प्रेमी मन ल ये आयोजन म सामिल होए बर विनती करिन हे।
() बसंत राघव

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।

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