रिश्वत का सौदा पड़ा भारी: 12 हजार लेते पकड़ा गया, 3 साल की जेल
20 हजार की मांग, 12 हजार में फंसा—अब 3 साल जेल की सजा

रामानुजगंज….( पृथ्वीलाल केशरी)भ्रष्टाचार के मामले में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण हेमंत सराफ ने सहायक ग्रेड-2 गौतम सिंह आयम को दोषी करार देते हुए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
प्रकरण के अनुसार, नितेश रंजन पटेल वर्ष 2013 से 2017 तक की लंबित एरियर राशि 92,000 रुपये प्राप्त करने के लिए विकासखंड शिक्षा अधिकारी, वाड्रफनगर कार्यालय पहुंचे थे। वहां पदस्थ सहायक ग्रेड-2 गौतम सिंह आयम ने सेवा पुस्तिका के सत्यापन और एरियर बिल तैयार कर कोष, लेखा-पेंशन कार्यालय अंबिकापुर में जमा कराने के एवज में 20,000 रुपये रिश्वत की मांग की।
पीड़ित ने इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो ACB अंबिकापुर में दर्ज कराई। सत्यापन के लिए शिकायतकर्ता को डिजिटल वॉयस रिकॉर्डर दिया गया, जिसमें 8 अगस्त 2024 की बातचीत में आरोपी द्वारा रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। बाद में आरोपी 12,000 रुपये लेने पर राजी हो गया।
इसके बाद 13 अगस्त 2024 को एसीबी ने ट्रैप कार्रवाई कर आरोपी को 12,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया।
कोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान प्रस्तुत साक्ष्यों और रिकॉर्डिंग के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ऐसे अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं, जिनमें न्यूनतम तीन वर्ष से अधिकतम सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है और इनमें परिवीक्षा का लाभ नहीं दिया जा सकता।
न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपी द्वारा 14 अगस्त 2024 से 13 नवंबर 2024 तक न्यायिक अभिरक्षा में बिताई गई अवधि को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 428 के तहत सजा में समायोजित किया जाएगा।





