बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षकों की प्रशासनिक पदों पर होने वाली प्रभार नियुक्तियों (अटैचमेंट/अस्थायी प्रभार) को लेकर एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

हाई कोर्ट के जस्टिस बीडी गुरु की एकल पीठ (सिंगल बेंच) ने साफ तौर पर कहा है कि टीचिंग कैडर (शिक्षण संवर्ग) के किसी भी शिक्षक या व्याख्याता (लेक्चरर) को सीधे प्रशासनिक कैडर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) के पद का प्रभार नहीं दिया जा सकता।

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जयपुर। वित्त (वेयज एंड मीन्स) विभाग ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत एसएनए-स्पर्श व्यवस्था में मदर सेंक्शन जारी करने और उपयोग की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने केंद्र सरकार के 21 जुलाई 2026 के मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप सभी संबंधित प्रशासनिक विभागों को आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा है।  निर्देशों के अनुसार, जिन केंद्र प्रायोजित योजनाओं में एक से अधिक स्टेट लिंक्ड स्कीम हैं, उनमें प्रत्येक एसएलएस के लिए अलग मदर सेंक्शन जारी कराने की व्यवस्था की जाएगी। इससे योजनावार व्यय की पहचान और निगरानी बेहतर होगी। वित्त विभाग ने मदर सेंक्शन के लिए अलग से वित्तीय सहमति लेने की प्रक्रिया को भी सरल किया...
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अदालत ने अपनी तल्ख टिप्पणी में स्पष्ट किया है कि ऐसा करना ‘शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009’ (RTE Act) की धारा 27 और तय सेवा नियमों का खुला उल्लंघन है। इस महत्वपूर्ण व्यवस्था के साथ ही हाई कोर्ट ने सूरजपुर जिले के प्रतापपुर में एक अंग्रेजी व्याख्याता को बीईओ का प्रभार देने वाले सरकारी आदेश को पूरी तरह अवैध ठहराते हुए तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है।

यह पूरा कानूनी मामला याचिकाकर्ता मुन्नू सिंह धुर्वे की ओर से दायर रिट याचिका पर आया है। मुन्नू सिंह धुर्वे वर्ष 2015 से सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (ABEO) के पद पर कार्यरत हैं, जो कि शिक्षा विभाग के अंतर्गत एक शुद्ध प्रशासनिक पद है।

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विभाग ने उनकी योग्यता और वरिष्ठता के आधार पर 14 जून 2021 को उन्हें प्रतापपुर (जिला-सूरजपुर) का प्रभारी ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) नियुक्त किया था। लेकिन 10 जून 2026 को स्कूल शिक्षा विभाग के अवर सचिव ने अचानक एक विवादास्पद आदेश जारी कर मुन्नू सिंह से यह प्रभार छीन लिया। इस आदेश के जरिए उनके स्थान पर शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बासदेई में पदस्थ अंग्रेजी के व्याख्याता अरुण कुमार पांडेय को प्रतापपुर का प्रभारी बीईओ बना दिया गया। शासन के इस फैसले को चुनौती देते हुए मुन्नू सिंह ने अपने अधिवक्ता वी.आर. तिवारी के माध्यम से हाई कोर्ट की शरण ली थी।

सुनवाई के दौरान व्याख्याता अरुण कुमार पांडेय की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मतीन सिद्दीकी ने शासन के फैसले का बचाव करते हुए एक तकनीकी दलील पेश की थी। उन्होंने कहा था कि प्रतापपुर का बीईओ पद ‘शेड्यूल्ड एरिया’ (अनुसूचित क्षेत्र) के अंतर्गत आता है और विभागीय नियमों के अनुसार इस क्षेत्र में केवल ‘T कैडर’ (Tribal Cadre – जनजातीय संवर्ग) के अधिकारी ही पदस्थ हो सकते हैं। चूंकि मूल रूप से प्रशासनिक अधिकारी मुन्नू सिंह ‘E कैडर’ (Education Cadre – सामान्य शिक्षा संवर्ग) से आते हैं, इसलिए वे इस पद पर रहने का कानूनी अधिकार नहीं रखते।

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हालांकि, हाई कोर्ट ने ‘छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक एवं प्रशासनिक संवर्ग) भर्ती तथा पदोन्नति नियम, 2026’ के मूल प्रावधानों का हवाला देते हुए प्रतिवादी पक्ष की इन सभी दलीलों को पूरी तरह से खारिज कर दिया।

जस्टिस बीडी गुरु ने अपने फैसले में देश के कानून का हवाला देते हुए कहा कि आरटीई (RTE) एक्ट, 2009 की धारा 27 साफ तौर पर यह अनिवार्य करती है कि टीचिंग कैडर के शिक्षकों को कुछ विशेष और असाधारण आपात स्थितियों (जैसे कि आम चुनाव या राष्ट्रीय जनगणना) को छोड़कर किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षणिक या प्रशासनिक पदों पर तैनात नहीं किया जाना चाहिए।

शिक्षकों का प्राथमिक और एकमात्र कर्तव्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना है, न कि दफ्तरों में बैठकर प्रशासनिक मलाई काटना या फाइलें आगे बढ़ाना।

अदालत ने नियमों की बारीकी से व्याख्या करते हुए बताया कि शिक्षा विभाग में विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) का पद भरने के लिए एक निश्चित ‘फीडर चैनल’ (योग्यता श्रेणी) तय है। इसके तहत 75 प्रतिशत पद एबीईओ (ABEO) की पदोन्नति से और 25 प्रतिशत पद हाई स्कूल के प्राचार्यों (Principals) के माध्यम से भरे जाते हैं। चूंकि अरुण कुमार पांडेय न तो नियमित प्राचार्य हैं और न ही एबीईओ, वे केवल एक व्याख्याता हैं, इसलिए वे इस प्रशासनिक पद की रेस से और तय फीडर चैनल से पूरी तरह बाहर हैं।

अदालत ने अपने फैसले में साफ किया कि यहां मुख्य विवाद ‘E कैडर’ बनाम ‘T कैडर’ का है ही नहीं, बल्कि मुख्य सवाल यह है कि क्या टीचिंग कैडर के व्यक्ति को प्रशासनिक पद सौंपा जा सकता है? कानूनन दोनों कैडर के काम, जिम्मेदारियां और प्रशासनिक अनुभव बिल्कुल अलग हैं।

उच्च प्रशासनिक अधिकारियों को टीचिंग कैडर के कर्मचारियों को प्रशासनिक अमले में नियुक्त करने के इस शॉर्टकट से पूरी तरह बचना चाहिए। हाई कोर्ट ने माना कि व्याख्याता अरुण कुमार पांडेय को बीईओ का प्रभार देने का राज्य सरकार का आदेश पूरी तरह से मनमाना, भेदभावपूर्ण और कानून के विपरीत था। अदालत ने मुन्नू सिंह धुर्वे की याचिका को स्वीकार करते हुए सरकार के 10 जून 2026 के आदेश को निरस्त कर दिया है।