जनदर्शन से लेकर आदेश तक बेअसर: 19 लाख के भुगतान में फंसा प्रभारी, सिस्टम खामोश
36 दिन, 19 लाख और शून्य भुगतान: धान खरीदी केंद्र में जवाबदेही पर सवाल

बिलासपुर…मस्तूरी विकासखंड के जयरामनगर धान खरीदी केंद्र में काम पूरा कराने वाला प्रभारी आज खुद अपनी मेहनत की रकम के लिए भटक रहा है। खरीफ सीजन 2025-26 के दौरान सूतली, तारपोलीन, चौकीदारी और फड़ सफाई जैसे कार्यों में अपनी जेब से खर्च करने वाले प्रभारी वीरेंद्र टंडन को अब तक भुगतान नहीं मिला है, जबकि इसी मद में जारी करीब 19 लाख रुपए की राशि संस्था प्रबंधक द्वारा बैंक से निकाली जा चुकी है।
मामले ने तब और गंभीर रूप लिया जब शिकायत के बाद भी जांच प्रक्रिया ठहरती नजर आई। वीरेंद्र टंडन ने 24 फरवरी 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 2 मार्च को उप आयुक्त सहकारिता ने जांच के आदेश जारी करते हुए तीन दिन में प्रतिवेदन मांगा था। लेकिन 36 दिन गुजरने के बाद भी न जांच पूरी हुई, न ही भुगतान की कोई प्रक्रिया आगे बढ़ी।
पीड़ित का आरोप है कि प्रबंधक संतोष ने पूरी राशि आहरित कर ली है, लेकिन भुगतान देने से साफ इंकार कर रहा है। यहां तक कि खुली चुनौती दी जा रही है कि “जो करना है कर लो, पैसा नहीं मिलेगा।” इस बीच बैंक से मिली जानकारी ने मामले को और उलझा दिया है, जहां प्रबंधक के हस्ताक्षर से पूरी रकम निकाले जाने की पुष्टि हुई है। इससे बैंक प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
भुगतान न मिलने की स्थिति अब सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रही। सूतली सप्लायर, चौकीदार और सफाई मजदूर लगातार अपने पैसे के लिए दबाव बना रहे हैं। प्रभारी वीरेंद्र टंडन पर इसका मानसिक असर साफ दिख रहा है, और स्थिति इतनी बिगड़ चुकी है कि पूरा मामला व्यक्तिगत संकट में बदल गया है।
इधर, जिस समिति के जिम्मे किसानों से जुड़े काम हैं, वहां भी असर साफ दिख रहा है। केसीसी और खाद वितरण जैसे जरूरी काम प्रभावित हो रहे हैं। जांच की जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की धीमी प्रक्रिया और प्रबंधक की अनुपस्थिति से स्थिति और जटिल होती जा रही है।
पीड़ित ने पूरे मामले में कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग की है। आरोप है कि 19 लाख रुपए के इस मामले में गबन हुआ है, इसलिए संबंधित प्रबंधक, बैंक मैनेजर और जांच में देरी करने वाले अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए। साथ ही मजदूरों के बकाया भुगतान के लिए राशि की रिकवरी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है।
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राशि निकल चुकी है, आदेश जारी हो चुके हैं, तो भुगतान आखिर रुका क्यों है—और जिम्मेदारी तय कब होगी।





