बिलासपुर… बिजली दरों में लगातार बढ़ोतरी और स्मार्ट मीटर को लेकर बढ़ते जन असंतोष के बीच कांग्रेस ने प्रदेश सरकार के खिलाफ दो महीने के चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान कर दिया है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ मिश्रा, ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री, पूर्व विधायक शैलेश पांडे और पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केसरवानी ने संयुक्त प्रेसवार्ता में आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनता की गाढ़ी कमाई पर बोझ डालकर निजी कंपनियों को फायदा पहुंचा रही है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि विडंबना यह है कि छत्तीसगढ़ बिजली उत्पादन में सरप्लस राज्य है, फिर भी यहां के उपभोक्ता देश के सबसे महंगे बिजली बिलों का बोझ उठा रहे हैं। उनका आरोप था कि प्रदेश की जनता महंगी बिजली, स्मार्ट मीटर और बढ़ते अधिभार के कारण आर्थिक रूप से परेशान है।

2 अगस्त से घर-घर पहुंचेगी कांग्रेस

कांग्रेस ने बताया कि 2 अगस्त से दो महीने तक प्रदेशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। कार्यकर्ता घर-घर जाकर स्मार्ट मीटर हटाने, बिजली दर वृद्धि वापस लेने और आम उपभोक्ताओं की शिकायतों से जुड़े आवेदन भरवाएंगे। अभियान के दौरान हस्ताक्षर और आवेदन एकत्र कर पहले जिला मुख्यालयों में बिजली कार्यालयों का घेराव किया जाएगा। इसके बाद प्रदेशभर के आवेदन मुख्यमंत्री और ऊर्जा मंत्री के समक्ष सौंपे जाएंगे। मांगें नहीं मानी गईं तो मुख्यमंत्री निवास का घेराव किया जाएगा।

भाजपा सरकार में पांच बार बढ़े बिजली के दाम

कांग्रेस नेताओं का दावा है कि भाजपा सरकार बनने के बाद पांच बार बिजली दरों में बढ़ोतरी की गई है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट, गैर-घरेलू उपभोक्ताओं के लिए 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट तथा कृषि पंपों की बिजली दरों में भी 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई। हाल में 12 प्रतिशत ईंधन अधिभार भी जोड़ा गया है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में अब तक बिजली दरों में कुल 31.23 प्रतिशत की वृद्धि हो चुकी है।

नेताओं ने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय केवल दो पैसे की बढ़ोतरी हुई थी और तब 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना लागू थी, जिससे आम उपभोक्ताओं को राहत मिलती थी।

स्मार्ट मीटर पर गंभीर सवाल

प्रेसवार्ता में कांग्रेस ने आरोप लगाया कि स्मार्ट मीटर वास्तविक खपत से अधिक रीडिंग दर्ज कर रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं का अनुबंध भार उनकी सहमति के बिना बढ़ाया जा रहा है और अतिरिक्त भार के नाम पर अर्थदंड भी वसूला जा रहा है। नेताओं ने कहा कि यही वजह है कि पिछले कुछ महीनों में कई उपभोक्ताओं के बिजली बिल तीन से चार गुना तक बढ़ गए हैं।

कांग्रेस ने यह भी दावा किया कि संसद में केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अप्रैल 2026 में स्पष्ट किया था कि स्मार्ट मीटर किसी भी उपभोक्ता पर अनिवार्य रूप से नहीं थोपे जाएंगे, बल्कि यह वैकल्पिक व्यवस्था होगी। ऐसे में बिना सहमति स्मार्ट मीटर लगाए जाना उपभोक्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन है।

शैलेश पांडे ने सुनाया अपना अनुभव

पूर्व विधायक शैलेश पांडे ने कहा कि पिछले तीन महीनों तक उनके घर की मीटर रीडिंग नहीं हुई और बिना पूर्व सूचना बिजली काट दी गई। बाद में उन्हें लगभग 41 हजार रुपये का बिल और अर्थदंड जमा करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि अब फिर से दो महीने से न तो रीडिंग हो रही है और न ही बिल मिल रहा है। उनका कहना था कि जब एक जनप्रतिनिधि के साथ ऐसा हो सकता है तो आम उपभोक्ता की परेशानी का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

सरकार बनी तो हटेंगे स्मार्ट मीटर

शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धार्थ मिश्रा ने कहा कि यदि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनती है तो केवल स्मार्ट मीटर लगाने का आदेश ही वापस नहीं लिया जाएगा, बल्कि लगाए जा चुके स्मार्ट मीटर भी हटाए जाएंगे और 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना दोबारा लागू की जाएगी।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

कांग्रेस ने सरकार से बिजली दरों में तत्काल कमी, 400 यूनिट तक बिजली बिल हाफ योजना की पुनर्बहाली और स्मार्ट मीटर व्यवस्था वापस लेने की मांग की है। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि दो महीने के आंदोलन के बाद भी सरकार ने मांगें नहीं मानीं तो मुख्यमंत्री निवास का घेराव कर प्रदेशव्यापी आंदोलन और तेज किया जाएगा।