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CG NEWS:शिक्षक और प्रधान पाठक से व्याख्याता पद पर पदोन्नतिः 21 संगठनों की ओर से उठाए गए सवाल और पोल खोल का ठीकरा किसके सर पर आएगा..?

CG NEWS:बिलासपुर:(मनीष जायसवाल)। शिक्षक और प्रधान पाठक से व्याख्याता पद पर पदोन्नति का मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। इस मामले की सुनवाई 15 सितंबर को जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस स.व.न. भट्टी की अदालत में होनी थी। यह मामला लगभग 45 वे नंबर पर सुनवाई के लिए था ,मगर 32 क्रमांक तक सुनवाई हो पाई ।इससे एक बार फिर सुनवाई की तारीख आगे बढ़ गई है। चूंकि मामला न्यायालय में है ऐसे में स्कूल शिक्षा विभाग की जल्दी बाजी एक बार फिर अगस्त 2023 के सहायक शिक्षक भर्ती के दौरान हुए चर्चित, बीएड और डीएड विवाद मामले की गलती दोहराने जैसी स्थिति बना रहा है..!

छत्तीसगढ़ राज्य व्याख्याता पदोन्नति समिति के प्रदेश संचालक मुकुंद उपाध्याय ने मामले के बारे में बताया कि 22 जुलाई 2025 को राज्य स्तरीय आदेश जारी कर व्याख्याता/व्याख्याता एल.बी. और टी संवर्ग में पदोन्नति आदेश जारी किए गए..। इसके बाद आठ सितम्बर 2025 को काउंसलिंग की नियमावली जारी की गई। जबकि विभाग को मालूम है कि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, और काउंसलिंग नियमावली आदेश में कहीं भी यह उल्लेख नहीं है कि पदोन्नति सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के अधीन होगी..।

उपाध्याय का कहना है कि राजपत्र में व्याख्याता पदोन्नति के लिए केवल प्रशिक्षित होना दर्ज है, जबकि बीएड नई भर्ती के लिए अनिवार्य है..। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने डीएड शिक्षकों को अपात्र माना था, लेकिन इस निर्णय को अंतिम नहीं मानते हुए समिति ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है..।

समिति के सदस्यों ने बताया कि तीन सालों से लगातार पदोन्नति के प्रयास हो रहे है..।हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर है और अगली सुनवाई 15 सितंबर को होनी थी जो आगे बढ़ गई है। इसी बीच लोक शिक्षण संचालनालय ने बीएड धारकों को पात्र मानकर पदोन्नति की सूची जारी कर दी और काउंसलिंग की तैयारी शुरू कर दी है..। जबकि सुप्रीम कोर्ट के नोटिस का जवाब विभाग की ओर से अब तक दाखिल नहीं किया गया..। इतना ही नहीं पदोन्नति से जुड़ा काउंसलिंग आदेश जिसमें एसएलपी क्रमांक तक का उल्लेख नहीं है..। समिति ने इस पर डीपीआई में आपत्ति दर्ज कराई है और अब सूचनाएं है कि विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करने की तैयारी की जा रही है..।
समिति का कहना है हम सिस्टम से हार गए अनुभव की कीमत नही .. अब सुप्रीम कोर्ट का आगामी फैसला ही तय करेगा कि डीएड शिक्षक व्याख्याता पदोन्नति के लिए पात्र माने जाएंगे या नहीं ..!

समिति विभाग की कार्यशैली के बारे में डीएड किए छात्रों की तरह सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कह रही लेकिन इस पूरे मामले के किस्से के सीन पुराने लगते है..! संभावित विवाद की स्क्रिप्ट अगस्त 2023 की सहायक शिक्षक भर्ती के विवाद, टी संवर्ग प्राचार्य पदोन्नति और युक्तियुक्तकरण के नीतियों की तरह मेल खाती है। नवा रायपुर के अधिकारियों ने नियमावली जारी करके एक बार फिर हलचल बढ़ा दी है..! यह क्यों बढ़ी.. इसके भी कई किस्से है…।

सस्पेंस खत्म करने के लिए किसी नतीजे की तलाश में थोड़ा सा इतिहास टटोला जाए तो मालूम होता है कि नवा रायपुर के अधिकारियों ने सरगुजा और बस्तर संभाग में कोर्ट के आदेश के बाद बीएड धारक सहायक शिक्षकों को हटाकर उनकी जगह डीएड धारकों को भर्ती दी गई थी।उसमें भी कुछ शिक्षकों के पद भार ग्रहण करने के बाद संशोधन किया गया..। विभाग में शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की कार्य योजना प्रस्तावित थी..। दोनों संभाग में एकल शिक्षक और शिक्षक विहीन स्कूलों की संख्या के आंकड़े भी सामने थे। जहां सहायक शिक्षकों को आसानी से पदस्थ किया जा सकता था..। जिससे इन दोनों संभाग में लंबे समय से स्कूलों में पदस्थ सहायक शिक्षकों को अतिशेष नहीं होना पड़ता..। लेकिन पिछली गलती कौन स्वीकारता..!

कड़ियां कुछ ऐसी भी है कि युक्तियुक्तकरण के बाद व्याख्याता से प्राचार्य की पदोन्नति कर दी गई। इसके बाद शिक्षक से व्याख्याता की पदोन्नति की जा रही है। कुछ और संवर्ग की पदोन्नति होगी। फिर आने वाले समय में शिक्षकों के गुपचुप ट्रांसफर भी होने की चर्चा है..। ऐसे में युक्तियुक्तकरण को लेकर राज्य स्तर पर करीब 21 शिक्षक संगठनों की ओर से कई सवाल उठाए गए और सरकार की जो पोल खोली गई है उसका ठीकरा किसके सर पर आएगा..?

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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