CG High Court/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने आर्थिक अपराध के मामले में आरोपी एटूजेड इंफ्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमित मित्तल को सीमित अवधि के लिए विदेश यात्रा की अनुमति दी है।

गुरुग्राम निवासी मित्तल 27 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 तक लंदन में व्यावसायिक बैठकों में शामिल हो सकेंगे। हाई कोर्ट ने यह अनुमति 10 करोड़ रुपये की सुरक्षा राशि सहित कई शर्तों के साथ दी है। मित्तल ने चार करोड़ रुपये की सुरक्षा देने की पेशकश की थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया।

अमित मित्तल के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रायपुर में दर्ज मामले के आधार पर मुकदमा चल रहा है। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी, 467 और 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7(बी) और 8 के तहत आरोप हैं। इन आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से होना है।

हाई कोर्ट ने 3 जुलाई 2026 को मित्तल को जमानत दी थी। जमानत की शर्तों के तहत उन्हें अपना पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करना था और न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर जाने पर रोक थी। इसके बाद मित्तल ने कारोबारी कामकाज के सिलसिले में विदेश जाने और पासपोर्ट वापस करने की अनुमति मांगी थी। उनका कहना था कि उन्हें निवेशकों, ऋणदाताओं और रणनीतिक साझेदारों के साथ महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठकों में शामिल होना है।

रायपुर की स्पेशल कोर्ट ने 1 सितंबर 2026 को उनका विदेश यात्रा संबंधी आवेदन खारिज कर दिया था। कोर्ट का कहना था कि कंपनी की ओर से किसी अन्य सक्षम अधिकारी या कर्मचारी को इन बैठकों में भेजा जा सकता है। इस आदेश को अमित मित्तल ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।

हाई कोर्ट में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हिमांशु पांडे ने बताया कि मित्तल कंपनी के प्रबंध निदेशक और सीईओ हैं तथा कंपनी के महत्वपूर्ण कारोबारी निर्णयों में उनकी भूमिका है।

उनके अनुसार, कंपनी सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध है और ब्रिटेन की एक कंपनी की ओर से बैठकों के लिए औपचारिक निमंत्रण भी दिया गया है। याचिका के साथ यात्रा कार्यक्रम, ठहरने की जानकारी और भारत वापसी का कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया गया। मित्तल की ओर से न्यायालय द्वारा निर्धारित सुरक्षा राशि जमा करने और निर्धारित समय पर भारत लौटने का आश्वासन दिया गया।

वहीं, राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता आशीष शुक्ला ने विदेश यात्रा की अनुमति का विरोध किया। उनका तर्क था कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध और सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग से जुड़ा है। राज्य की ओर से दावा किया गया कि जांच में मित्तल की कंपनी को ओवरटाइम और बोनस आदि मदों में करीब 34.06 करोड़ रुपये प्राप्त होने तथा इस राशि के कर्मचारियों तक नहीं पहुंचने की बात सामने आई है।

राज्य ने यह भी कहा कि कंपनी में अन्य निदेशक मौजूद हैं, जो कारोबारी बैठकों में शामिल हो सकते हैं। विदेश यात्रा की अनुमति मिलने पर मित्तल के वापस नहीं लौटने की आशंका भी जताई गई।

जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए विदेश यात्रा को व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकार के रूप में देखा और सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का उल्लेख किया। कोर्ट ने कहा कि केवल यह आधार पर्याप्त नहीं है कि कंपनी किसी अन्य अधिकारी या कर्मचारी को व्यावसायिक बैठकों में भेज सकती है। याचिका में मित्तल की कंपनी में प्रबंध निदेशक एवं सीईओ के रूप में भूमिका और निवेशकों, ऋणदाताओं तथा रणनीतिक साझेदारों के साथ उच्चस्तरीय बातचीत में उनकी व्यक्तिगत भागीदारी की आवश्यकता बताई गई है।

कोर्ट ने इसके बाद मित्तल को 27 सितंबर से 16 अक्टूबर 2026 तक लंदन यात्रा की अनुमति दी। उन्हें अबूधाबी होते हुए लंदन जाने की अनुमति दी गई है। ट्रायल कोर्ट को उनका पासपोर्ट वापस करने का निर्देश भी दिया गया है।

विदेश यात्रा की अनुमति के साथ हाई कोर्ट ने कड़ी शर्तें भी तय की हैं। मित्तल को यात्रा कार्यक्रम और विदेश में ठहरने का पूरा विवरण शपथपत्र के साथ ट्रायल कोर्ट में जमा करना होगा। इसके अलावा उन्हें 10 करोड़ रुपये की सुरक्षा राशि राष्ट्रीयकृत बैंक की सावधि जमा योजना में जमा करनी होगी। भारत लौटने के बाद पासपोर्ट ट्रायल कोर्ट में जमा करने पर यह सुरक्षा राशि वापस की जाएगी।

मित्तल को 16 अक्टूबर 2026 तक भारत लौटने का लिखित वचन भी देना होगा। निर्धारित समय पर भारत नहीं लौटने की स्थिति में ट्रायल कोर्ट 10 करोड़ रुपये की सुरक्षा राशि जब्त कर सकता है। भारत लौटने के बाद उन्हें आवश्यकता पड़ने पर ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होना और मुकदमे की कार्यवाही में सहयोग करना होगा। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्धारित शर्तों का उल्लंघन होने पर ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकता है।