सरगुजा विवि के कुलसचिव मामले में बड़ा फैसला, अटैचमेंट आदेश खारिज
दो साल बाद हाईकोर्ट से राहत: कुलसचिव को विवि के बाहर अटैच करने का आदेश निरस्त

बिलासपुर…हाईकोर्ट ने सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद एक्का से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि किसी कुलसचिव की पदस्थापना केवल विश्वविद्यालय में ही हो सकती है। उन्हें विश्वविद्यालय के बाहर किसी अन्य विभाग या कार्यालय में संलग्न नहीं किया जा सकता।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा संचालनालय में विनोद एक्का को संलग्न करने के आदेश को निरस्त कर दिया।
जांच के नाम पर किया गया था संलग्न
सरगुजा विश्वविद्यालय के कुलसचिव विनोद एक्का को वर्ष 2023 में कथित अनियमितताओं की जांच के नाम पर उच्च शिक्षा संचालनालय में संलग्न कर दिया गया था। इसके बाद वे विश्वविद्यालय में अपनी मूल जिम्मेदारी से अलग रहे।
दूसरे विश्वविद्यालय भेजने का दिया था आवेदन
संलग्न किए जाने के बाद विनोद एक्का ने शासन को आवेदन देकर अनुरोध किया था कि यदि उन्हें वर्तमान विश्वविद्यालय में पदस्थापित नहीं किया जा सकता तो किसी अन्य विश्वविद्यालय में पदस्थापना दे दी जाए।लेकिन करीब दो वर्षों तक इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया।
हाईकोर्ट में दायर की याचिका
लंबे समय तक कोई पहल नहीं होने पर विनोद एक्का ने एडवोकेट नीरज चौबे के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई जस्टिस पी.पी. साहू की एकल पीठ में हुई।
कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने माना कि कुलसचिव का पद विश्वविद्यालय से जुड़ा संवैधानिक और प्रशासनिक पद है, इसलिए उन्हें विश्वविद्यालय के बाहर किसी अन्य कार्यालय में अटैच नहीं किया जा सकता।
इसी आधार पर कोर्ट ने उच्च शिक्षा संचालनालय में संलग्न करने के आदेश को निरस्त कर दिया।





