सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद NCERT की किताबों में होगा बड़ा फेरबदल: अब विशेषज्ञों की समिति करेगी हर पाठ्यक्रम की समीक्षा
पीठ ने सुझाव दिया कि यदि सरकार पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन करती, तो यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होती। अदालत की इस चिंता पर सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि भविष्य में विषय विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति ही हर सामग्री की जांच-परख करेगी और उनके अनुमोदन के बिना किसी भी पाठ्यपुस्तक का प्रकाशन या डिजिटल प्रसार नहीं किया जाएगा।

NCERT/देश के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षणिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को सभी कक्षाओं की पाठ्यपुस्तकों की गहन समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
बुधवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को सूचित किया कि सरकार ने केवल आठवीं कक्षा ही नहीं, बल्कि पहली से बारहवीं तक की सभी पुस्तकों के पुनरीक्षण का निर्णय लिया है। यह कदम तब उठाया गया जब आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार से संबंधित कुछ ‘आपत्तिजनक’ सामग्री पर न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लिया था।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा कि सिर्फ एनसीईआरटी को निर्देश देना पर्याप्त नहीं है।
पीठ ने सुझाव दिया कि यदि सरकार पाठ्यक्रम की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति का गठन करती, तो यह प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी होती। अदालत की इस चिंता पर सरकार की ओर से आश्वासन दिया गया कि भविष्य में विषय विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय समिति ही हर सामग्री की जांच-परख करेगी और उनके अनुमोदन के बिना किसी भी पाठ्यपुस्तक का प्रकाशन या डिजिटल प्रसार नहीं किया जाएगा।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को भरोसा दिलाते हुए कहा कि सरकार ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक ‘व्यवस्थागत बदलाव’ शुरू कर दिए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की त्रुटियों की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने यह भी साझा किया कि एनसीईआरटी के निदेशक ने इस मामले में बिना शर्त माफी मांगते हुए एक विस्तृत हलफनामा दायर किया है। गौरतलब है कि इससे पहले 26 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने आठवीं कक्षा की विवादित सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के किसी भी नए संस्करण, पुनर्मुद्रण या इंटरनेट पर वितरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।





