नाम बदलकर नौकरी’ का खेल बेनकाब—फर्जी दस्तावेजों से प्रधान पाठक बना, जांच में खुली पूरी साजिश
सरपंच और शिक्षक एक ही पहचान से संचालित—शिकायत के बाद खुला फर्जीवाड़ा, आरोपी तत्काल निलंबित

बलरामपुर..(पृथ्वीलाल केशरी)..जिले में शासकीय सेवा हासिल करने के लिए रची गई एक सुनियोजित साजिश सामने आई है। वाड्रफनगर विकासखंड के ग्राम कोल्हुआ स्थित प्राथमिक शाला में पदस्थ प्रधान पाठक लालमन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। आरोप साफ है—नाम बदलकर और फर्जी शैक्षणिक दस्तावेजों के सहारे नौकरी हासिल की गई।
एक नाम, दो पहचान— खुला राज
पूरा मामला तब सामने आया जब ग्राम कुशफर निवासी सत्यनारायण ने कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज की। शिकायत में बताया गया कि ग्राम पंचायत कुशफर के सरपंच और शिक्षा विभाग में पदस्थ प्रधान पाठक—दोनों ‘लालमन सिंह’ एक ही पिता के नाम का उपयोग कर रहे हैं। यहीं से शक गहराया और जांच शुरू हुई।
जांच में खुलासा..पहचान उधार की
जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा गठित जांच टीम ने जब दस्तावेज खंगाले, तो पूरा फर्जीवाड़ा सामने आ गया। जांच में पाया गया कि कोल्हुआ में पदस्थ प्रधान पाठक का वास्तविक नाम रामदुलार है और पिता का नाम जीतू है। उन्होंने असली लालमन सिंह की पहचान और दस्तावेजों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की।
शिकायत से कार्रवाई तक लिया संज्ञान
11 अप्रैल 2025 को दर्ज शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच शुरू हुई। प्रतिवेदन सामने आते ही जिला शिक्षा अधिकारी ने तत्काल निलंबन का आदेश जारी कर दिया। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि दस्तावेजों में हेराफेरी कर सिस्टम को धोखा देने की कोशिश अब छुप नहीं पाएगी।
ऐसी नियुक्ति कैसे हो गई?
मामले ने नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फर्जी नाम और दस्तावेजों के सहारे सरकारी सेवा तक पहुंच बनाना, सिस्टम की जांच प्रक्रिया पर सीधा सवाल है। अब नजर इस पर है कि आगे आपराधिक कार्रवाई कितनी तेज और सख्त होती है।





