शिक्षक भर्ती और पदोन्नति में विषय बंधन व्यवस्था फिर प्रभावी, मंच ने बताया-शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम

रायपुर (मनीष जायसवाल) । शासन की ओर से जारी 13 फरवरी 2026 नवीन छत्तीसगढ़ राजपत्र के माध्यम से छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा सेवा (शैक्षणिक व प्रशासनिक) नियम लागू कर दिए गए हैं। इसके तहत सरकारी माध्यमिक शालाओं में भर्ती और पदोन्नति में विषय बंधन व्यवस्था फिर प्रभावी कर दी गई है। लंबे समय से चली आ रही मांग के बाद लिए गए इस निर्णय को शिक्षा गुणवत्ता की दिशा में बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है..। इससे विद्यार्थियों को उनके विषय के विशेषज्ञ शिक्षकों से अध्ययन का अवसर मिलेगा, वहीं अभ्यर्थियों और शिक्षकों को विषयवार स्नातक योग्यता के आधार पर भर्ती एवं पदोन्नति का अधिकार भी मिलेगा ।
शिक्षा व्यवस्था से जुड़े जिम्मेदार लोग यह मानते रहे कि शिक्षक किसी भी विषय को पढ़ा सकता है लेकिन जमीनी स्तर पर यह अनुभव किया गया कि विषय विशेषज्ञ शिक्षक के पास अपने विषय का गहन ज्ञान होता है, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक नींव मजबूत बनती है। विषय बाध्यता मंच के शिक्षकों ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि 30 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित स्कूल शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में सरकारी मिडिल स्कूलों में विषय बंधन लागू करने और 11 जुलाई 2023 के राजपत्र विलोपन का निर्णय लिया गया था। हालांकि निर्णय के बाद महीनों तक राजपत्र प्रकाशन न होने से पालकों, सामाजिक संगठनों, शिक्षकों और विद्यार्थियों में असंतोष की स्थिति बन रही थी।
मंच के सदस्यों ने बताया कि वर्ष 2023 से पूर्व तक मिडिल स्कूलों में विषयवार पदोन्नति की व्यवस्था थी, लेकिन गैर-विषयवार भर्ती के बाद स्थिति बिगड़ गई। गणित के शिक्षक संस्कृत पढ़ाने लगे और कला संकाय के शिक्षक गणित एवं विज्ञान पढ़ाने को विवश हुए। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की बुनियाद पर पड़ा। हाई स्कूल और हायर सेकेंडरी के शिक्षक भी महसूस कर रहे थे कि छात्रों की नींव कमजोर हो रही है। विशेषकर सरगुजा संभाग और बस्तर संभाग में जहां अच्छी खासी संख्या में नई भर्ती हुई थी। इसका एक और खामियाजा यह हुआ कि बीते वर्ष हुए युक्तियुक्तकरण के कारण कई वर्षो से एक ही विद्यालय में पदस्थ शिक्षक समान विषय के नव भर्ती शिक्षकों के कारण बाहर हो गए और उन्हें स्थानांतरण का दंश झेलना पड़ा।
विषय बाध्यता मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि उन्होंने प्रदेश के मंत्री, विधायक और जनप्रतिनिधियों की चौखट पर जाकर शिक्षा व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति को विस्तार से रखा था। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि गणित के शिक्षक हिंदी पढ़ा रहे थे और हिंदी के शिक्षक विज्ञान संभाल रहे थे, जिससे गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। पूर्व शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने भी विषय बंधन लागू करने की घोषणा की थी, लेकिन उनके मंत्रिमंडल से हटने के बाद निर्णय लंबित रहा। अब राजपत्र प्रकाशन के बाद मंच ने इसे शिक्षा गुणवत्ता सुधार की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया है।
मंच ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तथा स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव का आभार व्यक्त किया है। प्रदेश संयोजक एवं पदाधिकारी ऋषि राजपूत, आनंद कुमार साहू, नीलम मेश्राम, अमित ठाकुर, चेतन परिहार, लालमन पटेल, शैलेंद्र कुमार साहू, ललित साहू, महेश ध्रुव, मुकेश ध्रुव, रूद्र कश्यप, वसीम खान, वीना गुप्ता, कविता वर्मा, श्वेता भोसले, सीमा विश्वास, एकलव्य साहू, रूपेंद्र साहू, लिलेश्वर महावे, चंद्रशेखर तिवारी, केशव दास, अनिल सोरी, देवेंद्र ध्रुव, कांशीचुम्मेश्वर, योगेश्वर मोहन, पवन भास्कर, संतोष कश्यप, अरुण रावटे, देवेंद्र मानिकपुरी, नारायण साहू, डहरू राम ध्रुव, उमेश शुक्ला, योगेश साहू, तुकाराम, राघवेंद्र कंवर, लाला साहू, प्रकाश सोम, रोहित बघेल, रेख राज साहू, देवेश कुशवाहा, राजेश कश्यप सहित अन्य साथियों ने सरकार को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि विषय बाध्यता की यह बड़ी समस्या अब दूर होने से शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देगा।




