धान खरीदी में भारी गड़बड़ी का आरोप: 255 क्विंटल सत्यापन, 46 क्विंटल दर्ज — किसान की आत्मघाती चेतावनी
255 क्विंटल सत्यापन, 46 क्विंटल दर्ज — किसान ने आत्मघाती कदम की चेतावनी दी

बिलासपुर…छत्तीसगढ़ शासन द्वारा 30 जनवरी को धान खरीदी की अंतिम तारीख खत्म हो गई, हकीकत यह है कि खरीदी केंद्रों पर किसानों की कतारें आज भी खत्म नहीं हुई हैं। कई किसानों के टोकन कट चुके हैं, भौतिक सत्यापन भी हो गया, इसके बावजूद धान नहीं खरीदा गया। इससे किसानों में भारी आक्रोश है।
ऐसा ही एक गंभीर और चिंताजनक मामला बिलासपुर नगर निगम से लगे बेमा नगोई गांव से सामने आया है, जहां प्रशासनिक लापरवाही के चलते एक किसान पर लाखों रुपये के नुकसान का खतरा मंडरा रहा है।
भौतिक सत्यापन 255 क्विंटल , चढ़ाया 46 क्विंटल
बैमा नगोई निवासी किसान भानु प्रकाश शर्मा ने बताया कि उनके पास 12 एकड़ भूमि का वैध पंजीयन है और वर्षों से नागोई उपकेंद्र सोसाइटी में धान विक्रय करते आ रहे हैं। इस बार भी उनका टोकन कटा और धान का भौतिक सत्यापन करने नोडल अधिकारी शशि किरण पाटले स्वयं उनके घर पहुंचीं।
भौतिक सत्यापन के दौरान घर में मौजूद धान को तौलकर 255 क्विंटल 20 किलोग्राम दर्ज किया गया और आश्वासन दिया गया कि यही मात्रा समिति के रकबे में चढ़ेगी। इसके बाद किसान धान बिक्री की तैयारी में जुट गया।
लेकिन अगले ही दिन जब सोसाइटी से जानकारी ली गई तो सामने आया कि रकबे में 255 क्विंटल 20 किलो की जगह केवल 46 क्विंटल 80 किलो ही दर्ज किया गया है। यह जानकारी मिलते ही किसान और उसका परिवार स्तब्ध रह गया।
नोडल अधिकारी की गलती, समाधान अधर में
किसान द्वारा संपर्क करने पर नोडल अधिकारी ने स्वीकार किया कि भौतिक सत्यापन में 255 क्विंटल से अधिक धान पाया गया था, लेकिन “गलती से” रकबे में मात्र 46 क्विंटल 80 किलो ही चढ़ाया गया। इसके बाद उसी मात्रा का टोकन काट दिया गया।
नोडल अधिकारी ने यह भी कहा कि संशोधन के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जाएगा, लेकिन यह प्रक्रिया रायपुर स्तर से होगी, इसलिए समय लगेगा। इस बीच दो दिन की छुट्टी भी पड़ गई।
किसान के सामने जीवन का संकट
किसान भानु प्रकाश शर्मा का कहना है कि 30 जनवरी धान खरीदी की अंतिम तारीख है, ऐसे में बचा हुआ धान अब कहां बेचा जाए, यह समझ में नहीं आ रहा। यदि सरकारी खरीदी नहीं हुई तो मजबूरी में खुले बाजार में 1500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से धान बेचना पड़ेगा, जिससे लाखों का नुकसान तय है।
उनके अनुसार 255 क्विंटल 20 किलो धान की कुल कीमत लगभग 7 लाख 96 हजार रुपये होती है, जबकि वर्तमान में केवल 4 लाख 33 हजार रुपये का ही धान दर्ज किया गया है। यानी सीधे तौर पर करीब 3.36 लाख रुपये का नुकसान सामने है।
इसके अलावा सोसाइटी से 2.20 लाख रुपये का खाद-बीज और नगद कर्ज भी बकाया है। कुल मिलाकर किसान पर करीब 5.5 लाख रुपये से अधिक का आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
सांप-छछूंदर’ जैसी हालत, आत्महत्या की चेतावनी
किसान ने कहा कि उसकी स्थिति “सांप-छछूंदर” जैसी हो गई है। भौतिक सत्यापन सही हुआ, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही ने सब कुछ उलट दिया। यदि धान की खरीदी नहीं हुई तो उसके सामने जीवन चलाने का संकट खड़ा हो जाएगा।
किसान ने साफ कहा है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वह कलेक्टर से शिकायत करेगा। साथ ही चेताया कि ऐसी स्थिति में वह आत्मघाती कदम उठाने के लिए मजबूर हो सकता है।
यह मामला केवल एक किसान का नहीं, बल्कि उन सैकड़ों किसानों की तस्वीर है जो खरीदी की अंतिम तारीख के बाद भी सिस्टम की खामियों में फंसे हुए हैं।





