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CG Coal Scam: सुप्रीम कोर्ट का फैसला, सौम्या चौरसिया और रानू साहू समेत सभी आरोपियों की अंतरिम जमानत नियमित में तब्दील

छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला घोटाले और डीएमएफ (DMF) केस में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है। अदालत ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जांच की प्रक्रिया के बीच संतुलन बनाते हुए सौम्या चौरसिया और रानू साहू समेत सभी प्रमुख अभियुक्तों को बड़ी राहत प्रदान की है।

CG coal scam।दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोयला लेवी घोटाले और डीएमएफ (डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन) भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 28 जनवरी को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।

सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया, पूर्व कलेक्टर रानू साहू, सूर्यकांत तिवारी और समीर विश्नोई सहित सभी 20 से अधिक सह-अभियुक्तों को दी गई अंतरिम जमानत को अब ‘नियमित जमानत’ (Regular Bail) में परिवर्तित कर दिया है।

​सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया कि अभियुक्तों ने पहले ही लंबी अवधि की न्यायिक हिरासत का सामना किया है। अदालत ने संज्ञान लिया कि अधिकांश मामलों में अब तक आरोप तय (Charges Frame) नहीं हुए हैं और मुकदमा अभी भी अपने प्रारंभिक चरण में है।

न्यायालय ने स्थापित कानूनी सिद्धांत को दोहराते हुए कहा कि मुकदमे के पूर्व चरण में, विशेष रूप से जब लंबी हिरासत भुगती जा चुकी हो, निरंतर कारावास उचित नहीं है।

​भले ही अभियुक्तों को नियमित जमानत मिल गई हो, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी स्वतंत्रता पर कुछ कड़े प्रतिबंध और शर्तें जारी रखी हैं।सौम्या चौरसिया, रानू साहू और अन्य मुख्य आरोपियों को विचारण (Trial) लंबित रहने तक छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहना होगा।

 वे केवल अदालत में सुनवाई की तारीख से एक दिन पूर्व ही राज्य में प्रवेश कर सकेंगे।सभी को अपने पासपोर्ट न्यायालय में जमा करने होंगे और बिना अनुमति विदेश यात्रा नहीं कर पाएंगे।

अन्वेषण एजेंसियों (EOW-ACB और ED) द्वारा बुलाए जाने पर उन्हें जांच में पूर्ण सहयोग करना अनिवार्य होगा।

​सौम्या चौरसिया के लिए यह एक बड़ी कानूनी जीत मानी जा रही है। वे दिसंबर 2022 से अलग-अलग मामलों में लगभग 2 साल से अधिक समय तक हिरासत में रहीं। उनके साथ ही हेमंत जायसवाल, रजनीकांत तिवारी, मनीष उपाध्याय और अन्य सह-अभियुक्तों की जमानत को भी बरकरार रखा गया है।

इन मामलों में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और अधिवक्ता हर्षवर्धन परगनिहा ने पैरवी की। इसी मामले से जुड़े एक अन्य आरोपी जयचंद कोशल के नवीन प्रकरण पर अब 29 जनवरी 2026 को सुनवाई होनी तय है

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