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Bilaspur

सत्ता मज़बूत है, आम आदमी टूट रहा है—UGC नियमों पर कांग्रेस नेता महेश दुबे का विस्फोटक हमला.बिलासपुर से उठा सियासी तूफान

समानता के नाम पर असमानता का कानून!.. महेश दुबे

बिलासपुर ..विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा लागू किए गए ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को प्रोत्साहित करने के नियम–2026’ अब सियासी और सामाजिक विवाद का बड़ा केंद्र बनते जा रहे हैं। यह मामला अब केवल नीति या प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में गहराते असंतोष और असमानता की बहस में बदल चुका है। बिलासपुर भी इस उबाल से अछूता नहीं रहा। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव महेश दुबे उर्फ टाटा महाराज ने इस नियम को लेकर भारतीय जनता पार्टी और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए इसे सामाजिक संतुलन तोड़ने वाला और सामान्य वर्ग को मानसिक उत्पीड़न की ओर धकेलने वाला करार दिया है।

प्रेस विज्ञप्ति जारी कर महेश दुबे ने कहा कि यह मुद्दा किसी फ्लेक्स या तस्वीर का नहीं, बल्कि आम आदमी की तकलीफ़ और उसकी अनसुनी तक़रीर का है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि आज सत्ता मज़बूत होने के दावे बहुत किए जा रहे हैं, लेकिन रोटी, हवा और सच—तीनों कमजोर होते जा रहे हैं। सरकार मज़बूत है, लेकिन आम आदमी सबसे कमज़ोर, और यही इस दौर की सबसे कड़वी सच्चाई है।

UGC के नए नियमों पर सीधा हमला बोलते हुए महेश दुबे ने कहा कि समानता के नाम पर लाया गया यह कानून व्यवहारिक नहीं है और इससे समाज में नई असमानता पैदा हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दलित और पिछड़े वर्ग के छात्रों के साथ किसी भी तरह का अन्याय नहीं होना चाहिए और उनके उत्थान के लिए मुफ्त शिक्षा, हॉस्टल, किताबें और छात्रवृत्ति पूरी तरह दी जानी चाहिए, लेकिन नियम बनाते समय सामाजिक संतुलन को कुचलना न्याय नहीं हो सकता।

उन्होंने कहा कि सामान्य वर्ग का वह विद्यार्थी, जो आर्थिक रूप से कमजोर है, प्रतियोगिता के इस दौर में पहले ही भारी दबाव में जी रहा है। वह यह मानकर चलता है कि उसे बेहतर भविष्य के लिए अधिक अंक लाने होंगे और उसी हिसाब से मेहनत भी करता है। ऐसे में वर्तमान नियम प्रतियोगिता को समाप्त कर मानसिक उत्पीड़न का नया रास्ता खोल सकते हैं।

महेश दुबे ने इस कानून में दो स्पष्ट सुधारों की मांग की। उन्होंने कहा कि झूठी या साजिशन शिकायत करने वालों पर दोष सिद्ध होने की स्थिति में सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और दूसरा, सभी वर्गों को इन नियमों के दायरे में लाया जाए, ताकि किसी भी छात्र के साथ जातिगत आधार पर भेदभाव न हो।

आरक्षण व्यवस्था पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि आरक्षण अब सामाजिक न्याय का औजार नहीं, बल्कि “राजा का मुकुट” बनता जा रहा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक ही वर्ग के सिर पर सजा रह रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो परिवार तीन–चार पीढ़ियों से इसका लाभ लेकर सक्षम और सम्पन्न हो चुके हैं, उन्हें इसका निरंतर लाभ क्यों मिलना चाहिए, जबकि सुदूर जंगलों और अंदरूनी गांवों में संघर्षरत बच्चों तक इसका लाभ आज भी नहीं पहुंच पा रहा।

उन्होंने आरोप लगाया कि आज आरक्षण का बड़ा हिस्सा उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों के बच्चों को मिल रहा है, जबकि वास्तव में जरूरतमंद तबका अब भी हाशिये पर है। सरकार को वोट बैंक की राजनीति से ऊपर उठकर आर्थिक आधार पर आरक्षण पर गंभीर पहल करनी चाहिए, क्योंकि शिक्षा सबका अधिकार है।

अपने बयान के अंत में महेश दुबे ने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि स्वाभिमान का होना बेहद ज़रूरी है, क्योंकि अगर व्यक्ति चुप रहा तो लोग वहां भी दबाने की कोशिश करेंगे, जहां उसका अधिकार है। उन्होंने UGC नियमों पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि यह कानून सामाजिक न्याय नहीं, बल्कि सामाजिक टकराव को जन्म दे रहा है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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