CG Dhan Kharidi-साढ़े 6 करोड़ की हेराफेरी में पुलिस का बड़ा एक्शन, एमपी से कोरबा तक भाग रहे समिति प्रबंधक को दबोचा
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब अपेक्स बैंक के नोडल अधिकारी रामकुमार यादव ने 2 जनवरी 2026 को तुमला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि उपकेंद्र के कंप्यूटर रिकॉर्ड में 1,61,250 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज थी, लेकिन जब मिलों और संग्रहण केंद्रों तक पहुंचे धान का मिलान किया गया तो वहां केवल 1,40,663 क्विंटल धान ही पाया गया।

CG Dhan Kharidi-छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में धान खरीदी व्यवस्था में सेंध लगाकर शासन को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। जिले के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित, कोनपारा के धान खरीदी उपकेंद्र में खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान साढ़े छह करोड़ रुपये से अधिक की भारी अनियमितता पाई गई है।
इस सनसनीखेज घोटाले में संलिप्त छह अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ थाना तुमला में प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए अब तक दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अन्य आरोपी गिरफ्तारी के डर से फिलहाल फरार चल रहे हैं। पकड़े गए आरोपियों में समिति प्रबंधक जयप्रकाश साहू शामिल है, जिसे पुलिस ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में पीछा करने के बाद सफलतापूर्वक गिरफ्तार किया।
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब अपेक्स बैंक के नोडल अधिकारी रामकुमार यादव ने 2 जनवरी 2026 को तुमला थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि उपकेंद्र के कंप्यूटर रिकॉर्ड में 1,61,250 क्विंटल धान की खरीदी दर्ज थी, लेकिन जब मिलों और संग्रहण केंद्रों तक पहुंचे धान का मिलान किया गया तो वहां केवल 1,40,663 क्विंटल धान ही पाया गया। इस गणना के अनुसार रिकॉर्ड से 20,586 क्विंटल से अधिक धान गायब मिला। जब संयुक्त जांच दल ने मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन किया, तो वहां भी धान उपलब्ध नहीं पाया गया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि कागजों पर तो धान की खरीदी दिखाई गई लेकिन वास्तव में वह स्टॉक में था ही नहीं।
आर्थिक नुकसान का आकलन करने पर पुलिस ने बताया कि 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गायब हुए धान की कीमत लगभग 6 करोड़ 38 लाख रुपये बैठती है। इसके अलावा स्टॉक से लगभग 4,898 नग नए और पुराने बारदाने भी गायब पाए गए, जिनकी अनुमानित कीमत 17 लाख रुपये से अधिक है।
इस प्रकार शासन को कुल 6 करोड़ 55 लाख रुपये की प्रत्यक्ष आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भुनेश्वर यादव, जयप्रकाश साहू, शिशुपाल यादव, जितेंद्र साय, अविनाश अवस्थी और चंद्र कुमार यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। विवेचना की शुरुआत में ही पुलिस ने फड़ प्रभारी शिशुपाल यादव को 6 जनवरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिसके बाद से ही मुख्य आरोपी फरार चल रहे थे।
जशपुर पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए गठित विशेष टीम ने आधुनिक तकनीक और मुखबिरों का सहारा लिया। पुलिस को जानकारी मिली कि मुख्य आरोपी समिति प्रबंधक जयप्रकाश साहू गिरफ्तारी से बचने के लिए मध्य प्रदेश के दमोह जिले में छिपा हुआ था और वहां पहचान छिपाने के लिए दूसरे के नाम पर जारी सिम कार्ड का उपयोग कर रहा था।
पुलिस की दबिश की आहट मिलते ही वह दमोह से भागकर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कुसमुंडा क्षेत्र में शरण लेने पहुंचा। हालांकि, मुस्तैद पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उसे कुसमुंडा से अपनी हिरासत में ले लिया। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर उसे 21 जनवरी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।




