आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी–केजी बंदी पर हड़कंप, अभिभावक–शिक्षक कलेक्टर दफ्तर से कांग्रेस तक पहुँचे — प्रशासन के आश्वासन पर सवाल, सरकार की नीयत कटघरे में
आत्मानंद स्कूलों की नर्सरी–केजी बंदी पर अभिभावक–शिक्षक एकजुट

बिलासपुर…आत्मानंद स्कूलों में संचालित नर्सरी, केजी और एलकेजी कक्षाएं बंद करने के राज्य सरकार के फैसले ने बिलासपुर में शिक्षा व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। इस निर्णय से करीब 300 बच्चों का भविष्य अधर में लटक गया है। हालात ऐसे बन गए कि अभिभावक और शिक्षक एकजुट होकर पहले कलेक्टर कार्यालय और उसके बाद कांग्रेस नेतृत्व के दरवाजे तक पहुंचने को मजबूर हो गए।
फूटा अभिभावकों–शिक्षकों का गुस्सा
आत्मानंद स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक और कार्यरत शिक्षक बड़ी संख्या में कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और लिखित में अपनी पीड़ा दर्ज कराई। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कक्षाएं अचानक बंद कर देना केवल शैक्षणिक निर्णय नहीं, बल्कि बच्चों की मानसिक सुरक्षा और भविष्य से सीधा खिलवाड़ है।
अभिभावकों ने बताया कि उन्होंने सरकारी आत्मानंद स्कूलों में बच्चों का दाखिला इस भरोसे के साथ कराया था कि एलकेजी से लेकर 12वीं तक निरंतर, सुरक्षित और किफायती शिक्षा मिलेगी। निजी स्कूलों की भारी फीस से बचने के लिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर भरोसा किया था, जिसे अब तोड़ा जा रहा है।
सेवा समाप्ति के नोटिस ने सड़क पर खड़ा किया
शिक्षकों ने प्रशासन को बताया कि उन्हें अचानक सेवा समाप्ति का नोटिस थमा दिया गया। न बच्चों की पढ़ाई की कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था और न शिक्षकों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्टता। शिक्षकों ने कहा कि एक झटके में कक्षाएं बंद कर देना और नौकरी छीन लेना शिक्षा व्यवस्था को मजाक बना देने जैसा है।
कलेक्टर का आश्वासन, लेकिन सवाल बरकरार
कलेक्टर से हुई मुलाकात के दौरान यह आश्वासन दिया गया कि जिन बच्चों का इस सत्र में प्रवेश हुआ है, उनकी पढ़ाई जारी रहेगी और उन्हें अन्य स्कूलों में नहीं भेजा जाएगा। हालांकि अभिभावकों और शिक्षकों ने साफ कहा कि मौखिक आश्वासन से भरोसा नहीं बनता, जब तक इसे लिखित और स्थायी निर्णय में नहीं बदला जाता।
कलेक्टर के बाद कांग्रेस के पास पहुँचा आक्रोश
जिला प्रशासन से मिलने के साथ ही सभी अभिभावक और शिक्षक कांग्रेस जिला शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा से भी मिले। उन्होंने पूरी स्थिति से अवगत कराते हुए कहा कि प्रशासनिक अनिश्चितता ने बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को मानसिक रूप से तोड़ दिया है।
सिद्धांशु मिश्रा का सीधा हमला
सिद्धांशु मिश्रा ने कहा कि आत्मानंद स्कूल गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के लिए शुरू किए गए थे, लेकिन सत्ता बदलते ही सरकार ने इन्हें कमजोर करने की ठान ली है। नर्सरी, केजी और एलकेजी बंद करने का फैसला निजी स्कूल लॉबी के सामने घुटने टेकने जैसा है।
उन्होंने कहा कि डीएमएफ मद में पैसे नहीं होने का तर्क गढ़ा जा रहा है, जबकि बिलासपुर जैसे जिले में एसईसीएल, एनटीपीसी और खनिज रॉयल्टी से पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। सवाल यह नहीं है कि पैसा है या नहीं, सवाल यह है कि सरकार शिक्षा पर खर्च करना चाहती है या नहीं।
प्रशासन और सरकार दोनों कटघरे में
कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि यह केवल प्रशासनिक मामला नहीं है। यदि जिला प्रशासन सरकार के गलत फैसलों पर आंख मूंदकर अमल करेगा, तो जिम्मेदारी से बच नहीं पाएगा। कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से सदन तक ले जाएगी और बच्चों व शिक्षकों के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस की दो टूक मांग
कांग्रेस पार्टी ने मांग की है कि आत्मानंद स्कूलों में नर्सरी, केजी और एलकेजी कक्षाएं तत्काल प्रभाव से नियमित रूप से संचालित की जाएं, शिक्षकों की सेवा बहाली हो और पूरे निर्णय को लिखित रूप में सार्वजनिक किया जाए।
कांग्रेस का कहना है कि शिक्षा पर कटौती कर समाज को अंधकार की ओर धकेला जा रहा है और आत्मानंद स्कूलों को कमजोर करना सीधे तौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों के भविष्य पर हमला है।





