रतनपुर नगर पालिका का नया कारनामा – विधायक निधि को भी बनाया उगाही का जरिया!..पैसे दो, आदेश लो” का खेल!

बिलासपुर (रतनपुर)..नगर पालिका रतनपुर की भ्रष्टाचार गाथा मानो हर रोज़ एक नया अध्याय लिख रही हो। पहले जहां इंजीनियर द्वारा ठेकेदारों से कमीशन के लिए बारकोड भेज धमकी देने का मामला सामने आया था, वहीं अब एक और चौंकाने वाला खुलासा नगर पालिका की सड़ांध को उजागर करता है।
सूत्रों के अनुसार, नगर पालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप, सीएमओ खेल कुमार पटेल और इंजीनियर सिरिल भास्कर की तिकड़ी ने एक संगठित सिंडिकेट खड़ा कर रखा है। इस सिंडिकेट का खुला फरमान है — “पैसे दो और कार्य आदेश लो”।
विधायक निधि को बनाया बंधक
28 अप्रैल 2025 को NIT/275/तक.श/न.पा.प/2025 के तहत विधायक अटल श्रीवास्तव की निधि से 2 लाख से 8 लाख तक के 16 निर्माण कार्यों की निविदाएँ आमंत्रित की गईं। पहली व दूसरी निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, ठेकेदारों ने भाग लिया और सभी औपचारिकताएँ भी संपन्न हुईं।
लेकिन हैरत की बात यह है कि चार महीने बीत जाने के बाद भी कार्यादेश जानबूझकर रोक दिए गए हैं। कारण साफ है – सिंडिकेट ने ठेकेदारों पर दबाव बनाया है कि 6 प्रतिशत कमीशन जमा करो तभी फाइल आगे बढ़ेगी।
तीनों बड़े पदाधिकारियों ने आपस में कमीशन का बंटवारा भी तय कर लिया है – अध्यक्ष, सीएमओ और इंजीनियर – सबको 2-2 प्रतिशत। इतना ही नहीं, ठेकेदारों को साफ धमकी दी गई है कि अगर पैसा नहीं दिया तो काम निरस्त कर दिया जाएगा।
भ्रष्टाचार की जड़े और गहरी
इस पूरे खेल में केवल स्थानीय अधिकारी ही नहीं, बल्कि बड़े-बड़े सफेदपोश भी शामिल बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि शिकायतें होने के बावजूद अब तक कार्रवाई का नामोनिशान तक नहीं है। जबकि, एक ईमानदार इंजीनियर ने मामले की शिकायत एसीबी, प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री और कलेक्टर तक की है।
इसके बावजूद कार्रवाई की बजाय दोषियों को ढाल बनाकर बचाने का खेल जारी है। साफ है कि नगर पालिका रतनपुर भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है, जहाँ नियम-कानून, शासन-प्रशासन सब बंधक बना दिए गए हैं।
उठ रहे गंभीर सवाल
गंभीर सवाल यह उठता है कि निविदा जारी होने के बाद चार महीने से कार्यादेश क्यों रोके गए हैं? अगर विधायक निधि से अधिक राशि की अनुशंसा 19 जुलाई 2025 को पत्र क्रमांक 1862 द्वारा करवा ली गई थी, तो फिर ठेकेदारों को क्यों लटकाया जा रहा है? नगर पालिका समिति के अनिवार्य साइन को आखिर कमीशन का जाल क्यों बना दिया गया है?
सवालों के घेरे में पूरा तंत्र
रतनपुर नगर पालिका अब विकास का नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का प्रतीक बन गई है। यहाँ जनता के पैसे से योजनाएँ निकलती हैं, विधायक निधि तक का पैसा बंदक बनाया जाता है और विकास कार्य आदेश पर भी नेताओं-अधिकारियों का सिंडिकेट उगाही की इबारत लिखता है। सवाल है कि क्या शासन-प्रशासन इस सफेदपोश गठजोड़ की ढाल बनेगा या फिर जनता के हक की आवाज़ बनकर इस सिंडिकेट को तोड़ेगा?





