CG NEWS:अब तो कई इंजनों की सरकार…… ! ऐसे में क्या राजेश अग्रवाल बदल पाएंगे सरगुजा की तस्वीर..?

CG NEWS:सरगुजा (मनीष जायसवाल) ।14 विधानसभा सीटों वाले सरगुजा संभाग पर इस समय भाजपा का कब्ज़ा है। मुख्यमंत्री सहित चार मंत्री इसी इलाके से आते हैं। यही वजह है कि मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ सरगुजा एक नए राजनीतिक मॉडल के रूप में चर्चा में है..। ठीक वैसे ही जैसे अंबिकापुर ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के जरिए देशभर में स्वच्छता का मॉडल प्रस्तुत किया है..। लेकिन सच्चाई यह है कि सरगुजा अब भी मैदानी संभागों से विकास की रफ्तार में काफी पीछे है..!
अंबिकापुर क्षेत्र से विधायक और अब मंत्री बने राजेश अग्रवाल से पूरे सरगुजा की जनता को बड़ी उम्मीदें हैं। उनका कार्यकाल भले ही ढाई–तीन साल का हो, लेकिन लोगों का मानना है कि यदि मजबूत नींव रख दी जाए तो आगे का रास्ता आसान होगा। पड़ोसी कस्बे उदयपुर और लखनपुर भी वर्षों से बुनियादी विकास की बाट जोह रहे हैं। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मंत्री बनने का लाभ उनके क्षेत्र को कितनी जल्दी और किस तरह से मिलता है।
अंबिकापुर की स्वच्छता की मिसाल सराहनीय है, पर शहर का विकास केवल सफाई तक सीमित नहीं रह सकता…। टूटी-फूटी सड़कें, बरसात में सड़क पर बहता पानी , उफनते नाले, अव्यवस्थित बाजार और बेलगाम सार्वजनिक परिवहन इस बात का सबूत हैं कि शहर की अंदरूनी तस्वीर उतनी चमकदार नहीं है जितनी बाहर से दिखती है..। हालात कुछ वैसे ही हैं जैसे कोई इमारत बाहर से रंग-रोगन से जगमगाती हो, मगर भीतर से सीलन और दरारों से भरी हो..!
सबसे बड़ी चुनौती सरगुजा के सामने परिवहन कनेक्टिविटी की है..। राज्य बने 25 साल पूरे होने को हैं, लेकिन रायपुर से बिलासपुर होकर अंबिकापुर तक सिर्फ एक ट्रेन ही चलती है..। यहां से तीन ट्रेनें अनूपपुर तक सीमित हैं और दिल्ली के लिए भी सप्ताह में केवल एक ट्रेन मिलती है..। जबलपुर की दिशा में भी मध्यप्रदेश से सीधी कनेक्टिविटी सिर्फ एक ट्रेन पर टिकी है। यही वजह है कि यहां के लोग महंगी बस यात्रा पर मजबूर है, और इस मजबूरी का फायदा बस ऑपरेटर मनमानी टिकट वसूल कर उठाते रहते है…!
अंबिकापुर शहर का ट्रैफिक भी किसी भूल-भुलैया से कम नहीं है। गांधी चौक जैसे इलाकों में रोजाना जाम की स्थिति रहती है। शहर की प्रमुख सड़कें स्ट्रीट मार्केट जैसी दिखती हैं जहां भारी वाहनों और स्थानीय यातायात का दबाव हर समय बना रहता है..। अतिक्रमण और अव्यवस्थित पार्किंग ने समस्या को और बढ़ा दिया है। बरसात आते ही नालियां जाम हो जाती हैं और शहर का नजारा किसी डूबते कस्बे जैसा हो जाता है। यही हाल बिलासपुर रोड से लगे लखनपुर और उदयपुर कस्बों का भी है, जहां विकास का इंफ्रास्ट्रक्चर वर्षो से ठहराव पर है..!
सरगुजा की जनता अब चाहती है कि विकास कागजों और भाषणों से निकलकर जमीनी हकीकत बने..। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि शहर और कस्बों को रिंग रोड और लिंक रोड जैसी योजनाओं से जोड़ा जाए ताकि भारी वाहनों का दबाव मुख्य बाजार से हट सके..। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत कर निजी वाहनों पर निर्भरता घटाई जाए। आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, सैटेलाइट मार्केट और मल्टीलेवल पार्किंग जैसी योजनाओं की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है.!
इतिहास गवाह है कि रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और दुर्ग जैसे शहरों में जब स्थानीय नेताओं को मंत्री पद मिला तो वहां विकास की गति तेज हुई। अब बारी सरगुजा की है..। अंबिकापुर की स्वच्छता की पहचान अपनी जगह है, लेकिन यह अधूरी है। जब तक सड़क, रेल और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार नहीं होगा, तब तक यह शहर चमकते आवरण के पीछे अधूरी किताब ही बना रहेगा..! गेंद अब राजेश अग्रवाल के पाले में है और जनता देख रही है कि वे इस क्षेत्र को सही मायनों में विकास की पटरी पर चढ़ा पाते हैं या नहीं..!