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बिहार विधान सभा चुनाव से एस आई आर आंदोलन कहां गुम हो गया…. तथाकथित नेता जो झंडाबरदार थे ,वो खामोश हो गये ?

बिहार चुनाव से पहले बहुत शोर था बम फूटने का….। बाद में हाइड्रोजन बम फटने का…..। दिवाली आई – गई….। छठ भी आ गया पर कहीं कोई आवाज नहीं …। बिना रिसर्च के दिशाहीन आंदोलन का नेतृत्व करने वाला  भविष्य का जिसको  प्रधानमंत्री कहा जाता है,  उसमें कितनी गंभीरता है ? यह एक सवालिया निशान है ?

30 सितंबर को चुनाव आयोग द्वारा माननीय उच्चतम न्यायालय को जानकारी दी गई मतदाता सूची से अपात्र  48 लाख मतदाताओं का नाम विलोपित कर दिया गया है । जिन्हें इससे शिकायत है वह निर्धारित प्रपत्र में आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं परंतु आज दिनांक तक एक भी आवेदन नाम जोड़ने का बिहार के सक्षम फोरम में प्रस्तुत नहीं किया गया। यह आंदोलन का नेतृत्व करने वालों के विश्वसनीयता पर स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न करता है।

कुछ सीटों पर फ्रेंडली फाइट है  । परंतु राष्ट्रीय जनता दल को मालूम है ,राहुल गांधी की अहमियत बिहार मे कितनी है । फिर भी  राहुल गांधी से  समझौता किया गया है । 2020 के चुनाव में आरजेडी का सत्ता में नहीं पहुंचने का बहुत बड़ा कारण कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन को माना गया था । समझौते में दी गई सीटों पर उनकी  हार हुई । मात्र 16 सीट जीत पाए । वोट चोर गद्दी छोड़ कोई विषय ही नहीं था । यह एनडीए को तश्तरी में उपहार दिया गया । राहुल जी मुख्य मुद्दा से बिहार की जनता को गुमराह कर दिये ।

जिस जंगल राज की बात एनडीए करता है । वही चुनाव के कुछ दिन पहले बिहार के हालात थे ।  लगातार हत्याएं हो रही थी दिनदहाड़े गोली चल रही थी उस विषय को छोड़ना ही नहीं था । एक प्रसिद्ध कहावत है – जहां अज्ञानता मे खुशी मिलती है वहां बुद्धिमानी की बात करना मूर्खता है । परिणाम जो भी आए एक्सिस इंडिया के प्रदीप गुप्ता का कहना है (हालाँकि वह निरंतर एग्जिट पोल में असफल हुआ है ) कि महिलाओं का वोट जाति  समीकरण से अलग हटकर पूरे बिहार में नितीश बाबू से आकर्षित है और पूरे देश में मोदी जी से….। बिहार में भी मोदी जी से 35 से 55% महिलाएं वोट करेंगी । नीतीश और मोदी जी के समझौते के चलते महिलाओं का वोट विभाजित नहीं हो रहा है । यह निश्चित है कि  एम वाई का वोट एनडीए के पास नहीं  ।

क्या   तेजस्वी के साथ युवा वर्ग का वोटर अपने को जोड़ पा रहा है ?  युवा दिन रात मेहनत करके जो रोजगार से वंचित है । योग्यता रखने के बाद वह जन्म संयोग  पर अपने को  पराजित मानकर जो हताशा मे चला जाता है ।  “राजा का बेटा राजा “हकदार का बेटा चपरासी”  परिवार वाद… ।

लालू प्रसाद जी कितने बड़े आदर्श और सिद्धांत लेकर तत्कालीन अब्दुल गफूर सरकार के विरुद्ध 1974 में  स्वर्गीय लोकनायक जयप्रकाश नारायण जी के आंदोलन के अगवा थे  । आर्थिक स्थिति से कमजोर लालू प्रसाद यादव जी तत्कालीन समय में पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष बने थे । हजारों युवा के आदर्श और रोल मॉडल थे । फिर क्या हुआ स्वर्गीय डॉ. राम मनोहर लोहिया जी ने अपनी पुस्तक में लिखा है  *यदि समाजवादियों का पतन हुआ तो उनके  गिरने की कोई सीमा नहीं है । लोहिया जी,  जिन्होंने पूरी जिंदगी अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया  ।स्वर्गीय परम श्रद्धेय डॉ. राम मनोहर लोहिया जी का समाजवादी चिंतन बहुत मौलिक था । वे मार्क्स और गांधी से असहमत थे।  कहां गलत हो गए आदरणीय लालू जी । आप तो लोहिया जी के विचारों से प्रभावित थे ।आप तो राजनीति के साथ अपराध में भी परिवारवाद का प्रयोग किये ।क्या   आज के दौर मे भी तेजस्वी को बिहार स्वीकार कर लेगा युवा नेतृत्व को ?

जबकि नीतीश जी के ऊपर दल बदल के आने का आरोप लगे  ।बिहार में एक नारा बहुत प्रसिद्ध था – ऐसा कोई सगा नहीं जिसे नीतीश ने ठगा नहीं …।परंतु आज दिनांक तक उनके ऊपर 1 रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप किसी ने भी नहीं लगाया । महागठबंधन में सीट तय नहीं होने से सिर्फ 12 सीट में आपस मे लड़ाई है  । लेकिन एक नेरेटिव पूरे बिहार में बन गया है कि ये लोग न्यूनतम साझा कार्यक्रम में भी एक मत नहीं है ।

वैसे इसमें दो मत नहीं है कि बिहार ज्ञान और मोक्ष का राज्य है ।ग्रामीण स्तर पर भी मतदाता ओपिनियन रखता है ।कभी महाराष्ट्र के प्रसिद्ध समाजवादी चिंतक स्वर्गीय मधु लिमेय मुंगेर से सांसद हुआ करते थे ।हिंदुस्तान के प्रसिद्ध मजदूर नेता स्वर्गीय जाजॅ फर्नांडीज निरंतर मुजफ्फरपुर से सांसद रहे । केंद्रीय मंत्री भी जातिवाद से पृथक महाराष्ट्रीयन और कन्नड़…। इन्होंने बिहार का प्रतिनिधित्व किया । स्वर्गीय लोकनायक जय प्रकाश नारायण जी का पूरे देश में आंदोलन सिहांसन खाली करो जनता आती है….. 1974 में पटना के गांधी मैदान से ही भ्रष्टाचार के विरुद्ध था जो पूरे देश का आंदोलन बन गया । जिसका परिणाम आपातकाल के परिणीति के रूप में सामने आया ।

बिहार के मतदाताओं के योग्यता पर कहीं कोई संदेह नहीं है । वह गुण दोष के आधार पर ही अपने मत का निर्णय करती है। लगभग 25 परसेंट फ्लोटिंग वोटर्स  हैं वो अभी अपना विचार पूर्व से तय नहीं करते हैं ।लेकिन वो लहर  रुझान के साथ चले जाते हैं ।परंतु जैसा 20 – 20 क्रिकेट मैच  का एक नियम है कि आखरी बॉल फेंकने के पहले आप नहीं बता सकते कौन सी टीम जीतेगी ??14 नवंबर का इंतजार रहेगा।

दीपक पाण्डेय

गैर पेशेवर राजनीतिक विश्लेषक

बिलासपुर (छत्तीसगढ)

 

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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