जब जिम्मेदारी बनी पहचान: सड़क सुरक्षा की मिसाल बने 13 वाहन चालक
हेलमेट-सीट बेल्ट से सम्मान तक, 13 चालकों की कहानी

बलरामपुर (पृथ्वी लाल केशरी)…सड़क पर सतर्कता और जिम्मेदारी सिर्फ नियमों की किताब तक सीमित नहीं होती, बल्कि वही व्यवहार दूसरों के लिए उदाहरण बनता है। 37वें राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के दौरान बलरामपुर में ऐसे ही जिम्मेदार आचरण को सार्वजनिक सम्मान मिला, जब 13 वाहन चालकों को उनके अनुशासित और सजग ड्राइविंग के लिए सम्मानित किया गया।
सारथी दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कलेक्टर राजेंद्र कुमार कटारा और पुलिस अधीक्षक वैभव बेंकर ने इन वाहन चालकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनके योगदान को सराहा। प्रशासन का यह कदम सड़क सुरक्षा को केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि सकारात्मक प्रेरणा के रूप में स्थापित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर कटारा ने कहा कि सड़क पर जिम्मेदार व्यवहार करने वाले चालक समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। उनका संयम, नियमों के प्रति सम्मान और दूसरों की सुरक्षा के प्रति सजगता ही सड़क दुर्घटनाओं को कम करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।
वहीं पुलिस अधीक्षक वैभव बेंकर ने कहा कि सड़क सुरक्षा किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि हर चालक थोड़ी सतर्कता और अनुशासन बरते, तो कई परिवारों को अपूरणीय क्षति से बचाया जा सकता है।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर और जिला यातायात प्रभारी विमलेश कुमार देवांगन भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि सड़क सुरक्षा केवल अभियान या महीने तक सीमित विषय नहीं, बल्कि रोजमर्रा के व्यवहार का हिस्सा बननी चाहिए।
सम्मानित किए गए वाहन चालकों के चेहरों पर आत्मविश्वास और गर्व साफ झलक रहा था। उनका कहना था कि यह सम्मान उन्हें और अधिक जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाने की प्रेरणा देगा।





