नियमों को ताक पर रखकर ली गई अनुमति पड़ी भारी: बिलासपुर जेडी ने कोरबा और रायगढ़ के शिक्षकों की बीएड अनुमति को किया निरस्त
शिक्षकों को पहले दी गई परीक्षा की अनुमति को रद्द करते हुए जेडी ने कोरबा व रायगढ़ के डीईओ को निर्देशित करते हुए लिखा है, प्रकरण का उचित प्रकार से परीक्षण करें यदि परीक्षा के पूर्व इस कार्यालय से अनुमति ली गई हो अथवा परीक्षा पूर्व प्रस्ताव इस कार्यालय को प्रेषित किया गया हो तो पृथक प्रतिवेदन प्रेषित करें ताकि संबंधित शिक्षक के प्रकरण पर पृथक से विचार किया जा सके।

बिलासपुर। शिक्षा विभाग में नियमों की अनदेखी कर परीक्षा की अनुमति लेना अब शिक्षकों और संबंधित अधिकारियों को भारी पड़ रहा है। बिलासपुर संभाग के संयुक्त संचालक (जेडी) शिक्षा ने एक बड़ा कड़ा कदम उठाते हुए कोरबा और रायगढ़ जिले के आधा दर्जन से अधिक शिक्षकों को दी गई बीएड (B.Ed) और अन्य स्नातकोत्तर परीक्षाओं की अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है।
जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि शिक्षकों ने परीक्षा देने के बाद अनुमति के लिए आवेदन किया था, जिसे जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) ने बिना उचित परीक्षण के मंजूरी दे दी थी।
संयुक्त संचालक शिक्षा संभाग, बिलासपुर द्वारा किए गए निरीक्षण में यह बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नियमों के अनुसार, किसी भी शासकीय सेवक को उच्च शिक्षा या किसी भी परीक्षा में शामिल होने के लिए परीक्षा से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है।
लेकिन कोरबा और रायगढ़ के मामले में शिक्षकों ने परीक्षा संपन्न होने या परिणाम आने के बाद अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत किए। हैरत की बात यह है कि जिला शिक्षा अधिकारियों ने भी इन आवेदनों की गंभीरता से जांच नहीं की और उन्हें जेडी कार्यालय भेज दिया, जहां से पहले त्रुटिवश अनुमति जारी हो गई थी।
जब इस पूरे मामले का पुनरीक्षण किया गया, तो पाया गया कि अजय श्रीवास्तव, अनिल रात्रे, मुकुन्द केशव उपाध्याय, चन्द्र प्रकाश पाटले, मोहम्मद इकबाल फैज, गजेन्द्र सिंह कंवर, जितेन्द्र कुमार कैवर्त, वीरू कुमार गुप्ता, मोहित कुमार पैकरा और दामोदर पटेल जैसे शिक्षकों ने नियमों का उल्लंघन किया है।
इनमें से कई शिक्षक मध्य प्रदेश की सरदार पटेल यूनिवर्सिटी, सी.वी रमन यूनिवर्सिटी और सुंदर लाल शर्मा मुक्त विश्वविद्यालय से बीएड व अन्य कोर्स कर रहे थे। जेडी ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा जारी पिछला आदेश ‘परीक्षा पूर्व अनुमति’ के लिए था, न कि परीक्षा के बाद ‘कार्योत्तर स्वीकृति’ के लिए।
इस बड़ी कार्रवाई के बाद जेडी ने कोरबा और रायगढ़ के जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश में कहा गया है कि इन सभी प्रकरणों का फिर से सूक्ष्मता से परीक्षण किया जाए।
यदि किसी शिक्षक ने वास्तव में परीक्षा से पहले आवेदन दिया था और उसका प्रस्ताव कार्यालय भेजा गया था, तो उसका पृथक प्रतिवेदन प्रस्तुत करें ताकि उस पर विचार किया जा सके। फिलहाल, बिना पूर्व सूचना के परीक्षा में बैठने वाले इन शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं, क्योंकि बिना वैध अनुमति के प्राप्त की गई इन डिग्रियों का लाभ उन्हें सेवाकाल में मिलना अब असंभव नजर आ रहा है।





