Congress Protest RTE Nursery Admission/रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के नियमों में हुए हालिया बदलाव ने सियासी गलियारों से लेकर आम जनता के बीच हलचल मचा दी है।

निजी स्कूलों में नर्सरी और प्री-प्राइमरी स्तर पर मिलने वाले मुफ्त प्रवेश को समाप्त कर सीधे कक्षा-1 से एडमिशन शुरू करने के सरकारी फैसले के विरोध में मंगलवार को राजधानी रायपुर में जमकर प्रदर्शन हुआ। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय का घेराव किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष श्री कुमार Menon के नेतृत्व में हुए इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार का यह फैसला गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

Congress Protest RTE Nursery Admission/कांग्रेस का कहना है कि पहले आरक्षित सीटों पर बच्चों को नर्सरी से ही शिक्षा का अधिकार मिलता था, जिससे उनकी बुनियादी शिक्षा मजबूत होती थी, लेकिन अब इस व्यवस्था को खत्म कर दिया गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे फैसले ले रही है, जिससे सीधा असर गरीब बच्चों की शुरुआती पढ़ाई पर पड़ेगा।

दरअसल, छत्तीसगढ़ सरकार ने RTE के तहत प्रवेश प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव किया है। अब निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर बच्चों को नर्सरी, पीपी-1 और पीपी-2 के बजाय सीधे पहली कक्षा में दाखिला दिया जाएगा। इस कदम से राज्य सरकार को सालाना करीब 63 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।

हालांकि, इस ‘बचत’ की कीमत गरीब परिवारों को चुकानी होगी, क्योंकि अब उन्हें अपने बच्चों की प्री-प्राइमरी शिक्षा के लिए खुद भारी-भरकम फीस भरनी होगी या फिर उन्हें सिर्फ आंगनबाड़ियों के भरोसे छोड़ना होगा।

Congress Protest RTE Nursery Admission/शिक्षाविदों ने भी इस निर्णय पर चिंता जाहिर की है। विशेषज्ञों का मानना है कि 3 से 6 वर्ष की उम्र बाल्यावस्था की शिक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है। इसी उम्र में बच्चे भाषा, व्यवहार और सीखने की नींव रखते हैं। आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों के बच्चे तो निजी स्कूलों में नर्सरी की पढ़ाई जारी रखेंगे, लेकिन गरीब बच्चे इस दौड़ में पिछड़ जाएंगे।

जब ये बच्चे सीधे कक्षा-1 में पहुंचेंगे, तो उन्हें फोनेटिक्स, बुनियादी शब्दावली और क्लास रूटीन समझने में कठिनाई होगी, जिससे अंग्रेजी माध्यम का पाठ्यक्रम उनके लिए बोझ बन सकता है। इससे न केवल बच्चों में आत्मविश्वास की कमी आएगी, बल्कि आगे चलकर स्कूल छोड़ने (ड्रॉप-आउट) की संभावना भी बढ़ सकती है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने मांग की है कि नर्सरी से एडमिशन की पुरानी व्यवस्था को तत्काल बहाल किया जाए और नियमों का पालन न करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हो। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने अपना फैसला वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और भी उग्र किया जाएगा।