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बिलासपुर में ‘चुपचाप’ उतरा तेंदुलकर परिवार: गांव की चौपाल से अस्पताल तक 24 घंटे की हलचल, शहर को भनक तक नहीं

सुबह साढ़े पांच बजे गुप्त आगमन, ग्रामीण जीवन से स्वास्थ्य व्यवस्था तक गहराई से लिया जायजा

बिलासपुर …शहर की रफ्तार सामान्य रही, लेकिन परदे के पीछे एक ऐसा दौरा चलता रहा, जिसने 24 घंटे बाद सामने आकर सबको चौंका दिया। विश्व क्रिकेट के बड़े नाम सचिन तेंदुलकर का परिवार मंगलवार तड़के बिलासपुर पहुंचा और बिना किसी सार्वजनिक हलचल के अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय रहा।

अंजलि तेंदुलकर, सारा तेंदुलकर और सानिया चांडोक की मौजूदगी पूरी तरह गोपनीय रही। सुबह करीब साढ़े पांच बजे शहर में प्रवेश के बाद तीनों सीधे मंगला चौक स्थित कोर्टयार्ड मैरियट में ठहरीं, जहां उनका 24 घंटे का प्रवास बेहद सीमित और सधे दायरे में रखा गया। होटल परिसर में सुरक्षा की हलचल दिखी, लेकिन पूरे कार्यक्रम को जानबूझकर कम प्रोफाइल रखा गया, ताकि किसी प्रकार की भीड़ या उत्सुकता न बने।

दोपहर होते-होते यह काफिला अचानकमार क्षेत्र के छपरवा-बम्हनी गांव पहुंचा और यहीं से इस दौरे की असली तस्वीर सामने आई। शहर की चकाचौंध से दूर, गांव की सादगी के बीच तीनों ने पैदल भ्रमण किया, लोगों से सीधा संवाद किया और ग्रामीण जीवन को नजदीक से समझने की कोशिश की। गांव में एक नवजात शिशु को गोद में लेकर स्नेह जताना, बच्चों के साथ सहज होकर बातचीत करना और स्थानीय माहौल में घुल जाना इस पूरे दौरे को अलग पहचान देता दिखा।

ग्रामीणों के साथ बातचीत के दौरान जीवनशैली, जरूरतों और वास्तविक परिस्थितियों पर फोकस रहा, जिससे यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं बल्कि जमीनी समझ का प्रयास बनकर सामने आया।

बुधवार सुबह करीब आठ बजे, नाश्ते के बाद तीनों ने होटल से प्रस्थान किया और सीधे गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। यहां स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति का जायजा लिया गया, फुलवारी केंद्र का निरीक्षण किया गया और डॉक्टरों के साथ बैठक कर व्यवस्थाओं पर चर्चा हुई। सूत्रों के मुताबिक यह पूरा दौरा एक सामाजिक संस्था के आमंत्रण से जुड़ा रहा और स्वास्थ्य क्षेत्र में संभावित सहयोग को लेकर भी बातचीत हुई।

खबर लिखे जाने तक तेंदुलकर परिवार गनियारी स्थित जन स्वास्थ्य केंद्र परिसर में मौजूद रहा और व्यवस्थाओं का अवलोकन करता रहा। वहीं यह भी बताया जा रहा है कि पूरा कार्यक्रम समाप्त करने के बाद परिवार आज शाम बिलासपुर से मुंबई के लिए रवाना हो सकता है।

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे बड़ी खासियत इसकी गोपनीयता रही। जिला प्रशासन और पुलिस ने पूरे दौरे को बेहद सीमित दायरे में रखा। सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय रही, लेकिन कहीं भी अनावश्यक हलचल या सूचना का प्रसार नहीं होने दिया गया। बताया जा रहा है कि इस उच्च-प्रोफाइल कार्यक्रम की जानकारी केवल चुनिंदा अधिकारियों तक ही सीमित रही।

24 घंटे का यह शांत लेकिन प्रभावशाली दौरा अब चर्चा का विषय बन गया है। गांव से लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था तक, तेंदुलकर परिवार ने जिन पहलुओं को नजदीक से देखा, उसके संकेत साफ हैं—बड़े नाम अब सीधे जमीन पर उतरकर वास्तविक हालात को समझने की कोशिश कर रहे हैं। बिलासपुर में हुई यह हलचल भले ही देर से सामने आई हो, लेकिन इसके असर दूर तक महसूस किए जा सकते हैं।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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