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“गुलाबी रात” वाले सरकारी सिस्टम का अट्टहास…

( रुद्र अवस्थी ) देश प्रेम की भावनाओं से भरपूर मनोज कुमार की मशहूर फिल्म “उपकार” का एक गाना अक्सर 15 अगस्त और 26 जनवरी को सुनाई देता है – “मेरे देश की धऱती, सोना उगले …. उगले हीरे मोती…।” लेकिन इस फिल्म में एक गाना और है , जिसमें कैबरे डांस का सीन है। “गुलाबी रात गुलाबी….. गुलाबी रात की हर बात गुलाबी…।” कैबरे डांस पर फिल्माए गए इस गाने के बीच में एक सीन है, जब एक खलनायक कैबरे हाल के दरवाजे से बाहर कोई टुकड़ा फेंकता है। जिसे देखकर दो गरीब बच्चे दौड़ते हैं….. लेकिन इसी बीच एक कुत्ता दौड़ कर आता है और वह टुकड़ा उठाकर ले जाता है। तभी स्क्रीन पर एक आवाज आती है- “गुलाबी रात के साये तले इन मासूम बच्चों की रात कितनी भयानक है…. कितनी काली है… और फिर दर्द से भरा गाना सुनाई देता है – काली यह रात काली….. काली रात की हर बात काली….। ये गुलाबी रात वाले काली रात के जिम्मेदार हैं….। शराब और शबाब के नशे में चूर……। ये कैसी रात कैसी…. ये बढ़ती जा रही है बात कैसी…..”।

“जश्न और दर्द” को एक साथ समेटे सिनेमा का यह सीन नजर के सामने से गुजर गया, जब छत्तीसगढ़ में हाल के दिनों में लगातार बैक- टू- बैक अश्लील डांस और सरकारी लोगों के नोट उड़ाने की खबरें सामने आई। तब लगा कि क्या कोई साठ साल पहले रिलीज हुई उपकार फिल्म का वह मर्मस्पर्शी सीन छत्तीसगढ़ में दोहराया जा रहा है ..? दरअसल कोई गौर करे तो उपकार के उस सीन की तरह छत्तीसगढ़ में भी विरोधाभासी तस्वीरें नज़र आ जाएंगी और तब यह सवाल करना पड़ेगा कि छत्तीसगढ़ में यह क्या हो रहा है…?  एक तरफ सुदूर इलाके में लाखों रुपए खर्च कर अश्लील डांस के आयोजन हो रहे हैं…. सरकारी सिस्टम में बैठे लोग खुलेआम नोट उड़ा रहे हैं…. उनके वीडियो वायरल हो रहे हैं । वहीं दूसरी तरफ ऐसे ही सुदूर इलाके में लोग अपने जंगल, खनिज और पर्यावरण को बचाने के लिए सड़क पर उतर रहे हैं। अश्लील डांस में नोट उड़ाने वालों पर सख्त कार्रवाई तो हो रही है। लेकिन इस सवाल को अब भी जवाब की तलाश है कि सरकारी सिस्टम में बैठे लोग कहां से ऐसी हिम्मत जुटा रहे हैं और सिस्टम का एक नया चेहरा पेश कर रहे हैं….? जो सिनेमा के सीन से तो मेल खाता है लेकिन सुशासन से मेल नहीं खाता।

साल बदला…. कैलेंडर बदला और नए साल के शुरुआती हफ्ते में छत्तीसगढ़ की एक खबर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई जब गरियाबंद में अश्लील डांस का वीडियो वायरल हुआ। जहां पैसे लुटाने वाले एसडीएम को सस्पेंड किया गया और तीन पुलिसकर्मी भी मुअत्तल कर दिए गए । इस मामले में आयोजकों के खिलाफ भी एक्शन हुआ और गिरफ्तारियां हुई। ठीक इसी के आसपास सूरजपुर का एक वीडियो वायरल हुआ । जो सरकारी रेस्ट हाउस का वीडियो था ।जिसमें डांस की तस्वीर भी वायरल हुई ।ताजा मामला बैकुंठपुर- कोरिया इलाके का है। जहां सोनहत ब्लॉक में फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन पर स्कूल परिसर में डांस का आयोजन किया गया ।मीडिया खबरों के मुताबिक करीब दस लाख रुपए खर्च कर डांस पार्टी बुलाई गई थी। इस आयोजन में रोजगार सहायक को पैसे उड़ाते हुए दिखाया गया ।वीडियो वायरल होने के बाद रोजगार सहायक को बर्खास्त कर दिया गया । छत्तीसगढ़ से एक के बाद एक लगातार सामने आ रही इस तरह की खबरों ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया है और प्रशासनिक संवेदनशीलता, सरकारी आचरण और जनभावनाओं के प्रति जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

यह इत्तेफाक है या कुछ और लेकिन इस तरह अश्लील डांस और खुलेआम पैसे लुटाने के वीडियो सुदूर जंगल में बसे इलाकों से आ रहे हैं। ऐसे ही जंगल के इलाकों से जंगलों की कटाई, खनिज संसाधनों के अंधाधुंध दोहन और पर्यावरणीय संकट को लेकर आम लोग सड़क पर उतर रहे हैं, ऐसे वीडियो भी पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जो इस बात की ओर इशारा करता है कि आने वाले कल की भयानक तस्वीर को लेकर छत्तीसगढ़ के लोग जागने लगे हैं और सड़क पर उतर रहे हैं। लेकिन ऐसे लोगों की फिक्र ना तो सरकारी सिस्टम में बैठे लोगों को है और न हीं इस सिस्टम को चला रहे लोगों में इसकी झलक मिल रही है। हसदेव, अमेरा, तमनार से लेकर छुई खदान तक लोग एक अंतहीन लड़ाई के लिए सड़क पर उतर रहे हैं। लेकिन उनके सवालों को लेकर नीचे से ऊपर तक सब खामोश हैं…..। अलबत्ता कुछ इसी तरह के इलाकों में अश्लील डांस और नोट उड़ाने की नुमाइश कर सिस्टम में बैठे लोग जनभानाओं को चिढ़ाने की कोशिश में लगे हुए दिखाई दे रहे हैं। जिन्हें देखकर लगता है कि एक तरफ ये गुलाबी रात वाले लोग जो काली रात के जिम्मेदार हैं…. शराब और शबाब के नशे में चूर हैं…. ये कैसी रात… कैसी… बढ़ती जा रही है बात कैसी….।

अश्लील डांस से जुड़ी हर खबर के साथ यह बात भी सामने आई है कि इसके लिए जिम्मेदार एसडीम से लेकर रोजगार सहायक तक सबके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। आयोजकों पर भी कड़ा एक्शन हुआ है। आज के दौर में किसी घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सिस्टम का एक्शन में आना लाजमी है। जांच पड़ताल में आगे जो भी हो, लेकिन वीडियो में नजर आ रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होती है। ऐसा कुछ आगे भी हुआ तो एक्शन होगा ऐसी उम्मीद की जाती है।लेकिन अहम सवाल यह है कि क्या सरकारी सिस्टम में बैठे लोगों को सिस्टम चलाने वालों का कोई डर नहीं है ? सरकार चलाने वालों का इकबाल कहां है  ? सरकारी सिस्टम में बैठे लोग क्यों ऐसी हिम्मत कर लेते हैं कि अश्लील डांस का आयोजन कराएं और खुलेआम पैसे भी लुटाएं….?  भर पेट खाने के बाद लुटाने के लिए भी नोट की गड्डी अगर उनकी जेब में पहुंच रही है तो क्या इसके सहारे भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुंचना आसान नहीं है…?  ऐसे मामले सामने आने के बाद करवाई तो होगी ही ।लेकिन कोई ऐसी हरकत करने की हिम्मत ही ना करें ऐसा इंतजाम भी जरूरी है । नहीं तो आने वाले दौर में आम लोगों की चिंता- फिकर और सजगता के सामने “गुलाबी रात गुलाबी…” की तरह सरकारी सिस्टम का अट्टहास आगे भी सुनाई देता रहेगा।।

मशहूर शायर अदम गोंडवी साहब लिख गए हैं-

उधर जम्हूरियत ढोल पीटे जा रहे हैं वो

इधर पर्दे के पीछे बर्बरीयत है नवाबी है..

 

Chief Editor

छत्तीसगढ़ के ऐसे पत्रकार, जिन्होने पत्रकारिता के सभी क्षेत्रों में काम किया 1984 में ग्रामीण क्षेत्र से संवाददाता के रूप में काम शुरू किया। 1986 में बिलासपुर के दैनिक लोकस्वर में उपसंपादक बन गए। 1987 से 2000 तक दिल्ली इंडियन एक्सप्रेस ग्रुप के राष्ट्रीय अखबार जनसत्ता में बिलासपुर संभाग के संवाददाता के रूप में सेवाएं दीं। 1991 में नवभारत बिलासपुर में उपसंपादक बने और 2003 तक सेवाएं दी। इस दौरान राजनैतिक विश्लेषण के साथ ही कई चुनावों में समीक्षा की।1991 में आकाशवाणी बिलासपुर में एनाउँसर-कम्पियर के रूप में सेवाएं दी और 2002 में दूरदर्शन के लिए स्थानीय साहित्यकारों के विशेष इंटरव्यू तैयार किए ।1996 में बीबीसी को भी समाचार के रूप में सहयोग किया। 2003 में सहारा समय रायपुर में सीनियर रिपोर्टर बने। 2005 में दैनिक हरिभूमि बिलासपुर संस्करण के स्थानीय संपादक बने। 2009 से स्वतंत्र पत्रकार के रूप में बिलासपुर के स्थानीय न्यूज चैनल ग्रैण्ड के संपादक की जिम्मेदारी निभाते रहे । छत्तीसगढ़ और स्थानीय खबरों के लिए www.cgwall.com वेब पोर्टल शुरू किया। इस तरह अखबार, रेडियो , टीवी और अब वेबमीडिया में काम करते हुए मीडिया के सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
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