Bilaspur

ईडी की सख्ती पर सुप्रीम कोर्ट का ब्रेक?.. 28 आबकारी अधिकारी जमानत पर बाहर..लेकिन जांच जारी रहेगी

बिलासपुर…छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में नया मोड़ आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 28 आबकारी अधिकारियों को अग्रिम जमानत दे दी है। इस आदेश के बाद इन अधिकारियों की गिरफ्तारी फिलहाल टल गई है। सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच पर सवाल उठने लगे हैं, हालांकि ईडी ने साफ किया है कि जांच अब भी पूरी गंभीरता से जारी रहेगी।

संगठित कारोबारी गठजोड़ का खुलासा

ईडी की रिपोर्ट के अनुसार, यह घोटाला केवल सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें एक संगठित कारोबारी गठजोड़ सक्रिय था। शराब के लाइसेंस देने से लेकर कमीशन तय करने तक की प्रक्रियाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। जबकि बदले में संगठित गिरोह के सदस्यों को कमीशन के रूप में करोड़ों रुपये मिले।

विदेशी कंपनियों पर भी दबाव

जांच में यह भी सामने आया कि विदेशी शराब कंपनियों पर भी बिक्री के बदले तय कमीशन देने का दबाव बनाया गया। इसके बाद यह रकम फर्जी कंपनियों और फ्रंट फर्म्स के माध्यम से इधर-उधर की गई।

प्रभावशाली लोगों की मिलीभगत

ईडी ने बताया कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, निरंजन दास, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल समेत कई प्रभावशाली लोगों ने मिलकर एक संगठित गिरोह बनाया। इस गिरोह के माध्यम से सरकारी शराब दुकानों की आपूर्ति पर कमीशन वसूली, अतिरिक्त उत्पादन की अवैध बिक्री और विदेशी शराब की अवैध वसूली की व्यवस्था की गई।

 कंपनियों को फायदा, 3200 करोड़ का घोटाला

वर्ष 2020-21 में लागू की गई नई शराब नीति के जरिए तीन कंपनियों – ओम साईं बेवरेज, नेक्सजेन पावर इंजिटेक प्राइवेट लिमिटेड और दिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड – को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। अनुमान है कि इस घोटाले के जरिए 3200 करोड़ रुपये से अधिक का घोटाला हुआ।

अब तक कई गिरफ्तारियां

अब तक इस मामले में पूर्व प्रशासनिक अधिकारी अनिल टुटेजा, अरुणपति त्रिपाठी, निरंजन दास, अनवर ढेबर, विकास अग्रवाल, अरविंद सिंह, विजय कुमार भाटिया, संजय मिश्रा, मनीष मिश्रा और अभिषेक सिंह सहित कई नेताओं और कारोबारियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट का ताजा आदेश इस बड़े घोटाले की जांच में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

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