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शराब दुकान पर ऐसा पलटवार: रात को मना किया, सुबह खुलवाने कलेक्टर पहुँचे… गाँव का अनोखा किस्सा

बिलासपुर…जिले के सकरी थाना क्षेत्र के कोणापूरी बरदुलापारा में शराब दुकान को लेकर एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसे देखकर प्रशासन भी उलझ गया। आमतौर पर गांवों में शराब दुकान बंद कराने के लिए लोग सड़क पर उतरते हैं, लेकिन यहाँ मामला उल्टा हो गया। रात में दुकान शुरू होने से पहले विरोध हुआ, और सुबह होते-होते एक दूसरा समूह दुकान खुलवाने की मांग लेकर कलेक्टरेट पहुँच गया।

रात का विरोध: बिना बोतल उतारे गाड़ी लौटी

रविवार देर रात दुकान में पहला स्टॉक पहुंचाने गाड़ी पहुँची ही थी कि ग्रामीणों का एक जत्था अचानक जमा हो गया। नारेबाज़ी शुरू हुई और विरोध इतना तेज़ हुआ कि गोदाम का ताला भी नहीं खुल सका। पुलिस की मौजूदगी में भी स्थिति तनावपूर्ण रही और स्टॉक गाड़ी खाली हाथ लौट गई।

सुबह की कहानी पलटी: “दुकान खुलनी चाहिए

सोमवार सुबह वही गाँव एक बिल्कुल अलग दृश्य का गवाह बना। इस बार एक दूसरा धड़ा खड़ा था—और यह धड़ा खुलेआम दुकान के समर्थन में था। ग्रामीण कलेक्टरेट पहुँच गए और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि दुकान खुलना गाँव के हित में है। जिले में ऐसा दृश्य बेहद कम देखने मिलता है, जहाँ विरोध नहीं बल्कि “दुकान चालू करवाने” के लिए मुहिम चलती दिखे।

कलेक्टरेट में चौंकाने वाला मोर्चा: दुकान बचाओ

अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने तर्क रखा कि दुकान बंद होने से गाँव में अवैध शराब की बिक्री बढ़ेगी और उसकी कोई निगरानी नहीं रहेगी। इसलिए नियंत्रित बिक्री ही बेहतर है। कलेक्टरेट परिसर कुछ देर तक इस अलग किस्म के आंदोलन की चर्चा में डूबा रहा।

गाँव दो खेमों में बंटा: सुरक्षा बनाम नियंत्रण की लड़ाई

जांच में सामने आया कि गाँव दो बिल्कुल विपरीत विचारों में बांटा हुआ है। विरोधी पक्ष का तर्क है कि दुकान खुली तो घरेलू विवाद, अपराध और युवा वर्ग पर असर बढ़ेगा। जबकि समर्थक कहते हैं कि सरकारी दुकान से पारदर्शिता रहेगी और अवैध कारोबार खत्म होगा। विवाद शराब से ज्यादा, उसके असर को लेकर है।

प्रशासन की चुनौती: दोनों पक्ष सक्रिय— फैसला मुश्किल

रात के विरोध और सुबह के समर्थन ने प्रशासन के लिए स्थिति पेचीदा बना दी है। दोनों पक्षों की मांगें दर्ज कर ली गई हैं और शासन स्तर पर आगे की प्रक्रिया पर विचार चल रहा है। फिलहाल दुकान का फैसला लंबित है, लेकिन यह गाँव अपने अनोखे अंदाज़ के कारण सुर्खियों में जरूर आ गया है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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