padma shri award 2026- बस कंडक्टर से लेकर 90 साल के कलाकार तक, गणतंत्र दिवस पर चमके देश के 45 गुमनाम रत्न, पद्म श्री से होंगे सम्मानित
पद्म श्री सम्मान दिए जाने वाले 45 गुमनाम नायकों के नाम सामने आए हैं। ये सभी लोग उन आम भारतीयों का प्रतीक हैं, जो चुपचाप अपनी दिनचर्या देश की सेवा में व्यतीत कर रहे हैं।

padma shri award 2026/गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक ‘पद्म श्री’ पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। इस बार की सूची बेहद खास है, क्योंकि इसमें उन 45 ‘गुमनाम नायकों’ (Unsung Heroes) को जगह मिली है, जिन्होंने बिना किसी प्रचार या शोर-शराबे के अपना पूरा जीवन समाज की सेवा और लुप्त होती कलाओं के संरक्षण में समर्पित कर दिया।
इन हस्तियों में कर्नाटक के एक पूर्व बस परिचालक से लेकर 90 साल के आदिवासी वाद्य यंत्र वादक तक शामिल हैं।padma shri award 2026
ये वे लोग हैं जिन्होंने व्यक्तिगत कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बावजूद भारत के कोने-कोने में शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और संस्कृति की अलख जगाई है। यह सम्मान वास्तव में उन आम भारतीयों का प्रतीक है जो चुपचाप राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं।
शिक्षा और साक्षरता के क्षेत्र में एक अद्भुत मिसाल पेश करने वाले कर्नाटक के 75 वर्षीय अंके गौड़ा को पद्म श्री के लिए चुना गया है। कभी बस कंडक्टर रहे गौड़ा ने मैसूरु के पास अपने गांव हरलाहल्ली में ‘पुस्तक माने’ नाम से दुनिया का सबसे बड़ा निःशुल्क पुस्तकालय स्थापित किया है। यहां 20 अलग-अलग भाषाओं की 20 लाख से अधिक पुस्तकें और दुर्लभ पांडुलिपियां मौजूद हैं, जो देशभर के पाठकों को सशक्त बना रही हैं। वहीं, चिकित्सा के क्षेत्र में मुंबई की बाल रोग विशेषज्ञ आर्मिडा फर्नांडीज का नाम प्रमुखता से उभरा है।padma shri award 2026
उन्होंने एशिया का पहला ‘ह्यूमन मिल्क बैंक’ स्थापित किया, जिससे मां के दूध से वंचित हजारों नवजात शिशुओं की जान बचाई जा सकी। इसी श्रेणी में महाराष्ट्र के डॉक्टर दंपति रामचंद्र और सुनीता गोडबोले को भी सम्मानित किया गया है, जिन्होंने छत्तीसगढ़ के दुर्गम और नक्सल प्रभावित आदिवासी इलाकों में सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर मानवता की नई इबारत लिखी है।
समाज सेवा की बात करें तो चंडीगढ़ के 88 वर्षीय रिटायर्ड डीआईजी इंदरजीत सिंह सिद्धू की कहानी हर किसी को प्रेरित करती है। वे पिछले 30 सालों से हर सुबह खुद सड़कों की सफाई करते हैं।
उन्होंने यह साबित कर दिया कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और स्वच्छता ही सच्ची ईश्वर भक्ति है। उधर, छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बच्चों के लिए स्कूल खोलने वाली बुदरी थाटी और जम्मू-कश्मीर के प्रतिष्ठित सामाजिक कार्यकर्ता बृज लाल भट को भी उनके निस्वार्थ कार्यों के लिए पद्म श्री दिया जाएगा।padma shri award 2026
कला और संस्कृति के संरक्षण की श्रेणी में राजस्थान के गफरुद्दीन मेवाती जोगी को चुना गया है, जो दुर्लभ वाद्य यंत्र ‘भापंग’ के उस्ताद हैं और मेवाती लोक शैली में महाभारत के 2,500 से अधिक दोहे सुनाने वाले गिने-चुने कलाकारों में से एक हैं।
छत्तीसगढ़ के लिए स्वर्णिम क्षण बस्तर की समाजसेविका, स्नेह और ममता की प्रतिमूर्ति ‘बड़ी दीदी’ के नाम से विख्यात श्रीमती बुधरी ताटी जी तथा जनजातीय अंचलों में निःस्वार्थ सेवा के जीवंत प्रतीक डॉ. रामचंद्र गोडबोले जी एवं सुनीता गोडबोले जी का पद्म श्री सम्मान के लिए चयनित होना पूरे… pic.twitter.com/OcXitrHQnX
— Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) January 25, 2026
इस सूची में उन कलाकारों और प्रशिक्षकों का भी सम्मान किया गया है जो भारत की प्राचीन युद्ध कलाओं और स्वदेशी वाद्य यंत्रों को जीवित रखे हुए हैं।
महाराष्ट्र के 90 वर्षीय भीकल्या लड़क्या ढिंडा, जो बांस और लौकी से बने ‘तारपा’ वाद्य यंत्र के जादूगर हैं, और पुडुचेरी के के. पजानिवेल, जो प्राचीन तमिल मार्शल आर्ट ‘सिलंबम’ को बढ़ावा दे रहे हैं, इस सम्मान के हकदार बने हैं। इसके अलावा, मध्य प्रदेश के बुंदेली युद्ध कला प्रशिक्षक भगवान दास रायकवाड़, मुरादाबाद के पीतल नक्काशी विशेषज्ञ चिरंजी लाल यादव और हरियाणा के खेम राज सुंद्रियाल, जिन्होंने लुप्त होती ‘जामदानी’ और ‘खेस’ बुनाई तकनीक को पुनर्जीवित किया, को भी पद्म श्री से नवाजा जाएगा। साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में वरिष्ठ पत्रकार कैलाश चंद्र पंत को पिछले छह दशकों से हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए यह सम्मान दिया गया है।





