Budget 2026/आगामी बजट 2026 को लेकर हर वर्ग की अपनी उम्मीदें हैं, लेकिन शहरों में किराये के मकान में रहने वाले और अपना घर खरीदने का सपना देखने वाले मध्यम वर्ग के लिए यह बजट बेहद खास हो सकता है। देश में रियल एस्टेट सेक्टर की सर्वोच्च संस्था क्रेडाई (CREDAI) ने वित्त मंत्रालय को कई ऐसे क्रांतिकारी सुझाव दिए हैं, जो यदि अमल में आते हैं, तो शहरी जीवन की तस्वीर बदल सकती है।

क्रेडाई ने सरकार से ‘नेशनल रेंटल हाउसिंग मिशन’ शुरू करने और ‘किफायती घर’ की परिभाषा में बड़े बदलाव करने की जोरदार पैरवी की है, जिससे न केवल घर खरीदारों को बल्कि किराये पर रहने वाले प्रवासियों को भी बड़ी आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।

ये खबर भी पढ़ें…
ias ips resignation – 14 महीने में 7 युवा IPS अधिकारियों ने सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया
ias ips resignation – 14 महीने में 7 युवा IPS अधिकारियों ने सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया
ias ips resignation/उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की चर्चित IAS divya mittal ने 30 अगस्त को पद से इस्तीफा...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

क्रेडाई की सबसे प्रमुख मांगों में से एक ‘नेशनल रेंटल हाउसिंग मिशन’ की शुरुआत करना है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच शहरों में प्रवासियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है, लेकिन व्यवस्थित और सस्ते किराये के घरों की भारी कमी बनी हुई है।

क्रेडाई का सुझाव है कि सरकार को डेवलपर्स और किरायेदारों, दोनों को टैक्स में रियायतें देनी चाहिए ताकि टियर-1 और टियर-2 शहरों में संगठित रेंटल स्टॉक तैयार किया जा सके।

ये खबर भी पढ़ें…
शिक्षक दिवस पर होगा राज्य स्तरीय सम्मान समारोह, चयनित शिक्षकों के लिए जरूरी निर्देश जारी
शिक्षक दिवस पर होगा राज्य स्तरीय सम्मान समारोह, चयनित शिक्षकों के लिए जरूरी निर्देश जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में वर्ष 2026 के राज्य शिक्षक सम्मान एवं स्मृति पुरस्कार समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। लोक...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

इससे काम के सिलसिले में शहर बदलने वाली वर्कफोर्स को सुरक्षित और किफायती छत मिल सकेगी, जिससे झुग्गी-बस्तियों के विस्तार पर भी लगाम लगेगी। क्रेडाई के अध्यक्ष शेखर पटेल के अनुसार, एक मजबूत रेंटल इकोसिस्टम बनाना आज की अनिवार्य जरूरत बन गया है।

इसके साथ ही, क्रेडाई ने ‘अफोर्डेबल हाउसिंग’ यानी किफायती घरों की वर्तमान परिभाषा को भी चुनौती दी है। संगठन का तर्क है कि साल 2017 में तय की गई 45 लाख रुपये की सीमा आज के समय में अप्रासंगिक हो चुकी है, क्योंकि मेट्रो शहरों में इस कीमत पर मकान मिलना लगभग नामुमकिन है। इसलिए, क्रेडाई ने मांग की है कि 45 लाख रुपये की इस ऊपरी सीमा (Cap) को पूरी तरह हटा दिया जाए। इसके अलावा, मेट्रो शहरों में किफायती घरों के कारपेट एरिया की सीमा 60 वर्ग मीटर से बढ़ाकर 90 वर्ग मीटर और नॉन-मेट्रो शहरों में 120 वर्ग मीटर करने का प्रस्ताव दिया गया है।

ये खबर भी पढ़ें…
शिक्षक दिवस की तारीफ और शिक्षक की वास्तविक स्थिति के बीच  अंतर क्यों है..?
शिक्षक दिवस की तारीफ और शिक्षक की वास्तविक स्थिति के बीच अंतर क्यों है..?
रायपुर (मनीष जायसवाल) ।5 सितंबर आते ही शिक्षक अचानक बहुत खास हो जाता है। शिक्षक दिवस पर उसके सम्मान में...
Plugin developed by ProSEOBlogger. Get free gpl themes.

यदि यह मांग मान ली जाती है, तो बड़े घर भी ‘किफायती’ श्रेणी में आ जाएंगे, जिससे उन पर केवल 1% जीएसटी और अन्य सरकारी लाभ मिल सकेंगे।

घर खरीदारों की जेब पर सीधा असर डालने वाला एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट को लेकर है। वर्तमान में इनकम टैक्स की धारा 24(b) के तहत होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट मिलती है, जिसे क्रेडाई ने बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की सिफारिश की है।

जमीन और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों के इस दौर में, टैक्स छूट की यह सीमा बढ़ने से मध्यम वर्ग के लिए होम लोन की किस्तें चुकाना आसान होगा और रियल एस्टेट बाजार में नई मांग पैदा होगी।