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Chhattisgarh

“चॉक खरीदने तक के पैसे नहीं”: आत्मानंद स्कूलों को लेकर सरकार पर कांग्रेस का हमला

आत्मानंद स्कूलों पर संकट? कांग्रेस का आरोप—फंड कटौती से कमजोर हो रही योजना

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**आत्मानंद स्कूलों पर सियासी घमासान

कांग्रेस का आरोप—फंड कटौती से योजना को कमजोर कर रही साय सरकार**

सुनील सिंह का तीखा हमला: “गरीब बच्चों के सपनों के साथ खिलवाड़”

बलरामपुर..( पृथ्वी लाल केशरी)…छत्तीसगढ़ में गरीब और मध्यमवर्गीय बच्चों को बेहतर अंग्रेज़ी माध्यम शिक्षा देने के उद्देश्य से शुरू की गई स्वामी आत्मानन्द इंग्लिश मीडियम स्कूल योजना को लेकर प्रदेश में नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार की नीतियों और फंड कटौती के कारण यह योजना धीरे-धीरे कमजोर होती जा रही है।

जिला कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता  सुनील सिंह ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह केवल एक योजना का मामला नहीं, बल्कि गरीब बच्चों के सपनों से जुड़ा मुद्दा है।

फंड में 64 प्रतिशत कटौती का आरोप

सुनील सिंह ने आरोप लगाया कि आत्मानंद स्कूलों को मिलने वाले फंड में करीब 64 प्रतिशत तक कटौती कर दी गई है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर स्कूलों की बुनियादी व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है।

उनके मुताबिक कई स्कूलों में बिजली बिल भरने तक के पैसे नहीं हैं, सफाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है और चॉक-डस्टर जैसी बुनियादी सामग्री तक के लिए स्कूल प्रशासन को परेशानी उठानी पड़ रही है।

सुनील सिंह ने तंज कसते हुए कहा, “सरकार बड़े-बड़े भाषणों में शिक्षा सुधार की बात करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्कूलों में चॉक खरीदने तक के पैसे नहीं छोड़े गए हैं। यह सुधार नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की नीति है।”

नाम बदलने की राजनीति का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को योजना चलाने से ज्यादा नाम बदलने की राजनीति में दिलचस्पी है।

कांग्रेस का आरोप है कि संत स्वामी आत्मानंद के नाम से चल रही योजना की पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

इस पर सुनील सिंह ने कटाक्ष करते हुए कहा,“भाजपा की नीति साफ है—जो योजना खुद नहीं बना सके उसका नाम बदल दो और जो जनता के काम की हो उसे धीरे-धीरे खत्म कर दो।”

शिक्षकों की छंटनी पर भी सवाल

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि कई जिलों में संविदा शिक्षकों की छंटनी की जा रही है और खाली पदों को भरा नहीं जा रहा।

सुनील सिंह ने कहा कि यदि शिक्षकों को हटाकर और पद खाली रखकर स्कूल चलाने की कोशिश होगी, तो यह शिक्षा व्यवस्था नहीं बल्कि केवल दिखावा होगा।

अभिभावकों की बढ़ी चिंता

सत्र के बीच में कक्षाएं बंद होने की चर्चाओं से अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए निजी स्कूलों की भारी फीस देना आसान नहीं है।

कुछ जगहों पर बच्चों के भविष्य को लेकर चिंता जताई गई, हालांकि जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पढ़ाई बीच में नहीं रुकने दी जाएगी।

आंदोलन की चेतावनी

सुनील सिंह ने चेतावनी दी कि यदि आत्मानंद स्कूलों को कमजोर करने या बंद करने की कोशिश की गई, तो कांग्रेस प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन करेगी।

उनका कहना है कि आत्मानंद स्कूल केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि हजारों गरीब परिवारों के बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद हैं।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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