“छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में तबादला.. आदेश के बावजूद अफसर का अड़े रहना — नीति की उड़ रही धज्जियां”

रायपुर..छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित आबकारी घोटाले में अभियोजन अधिकारी रहे मिथिलेश वर्मा का तबादला बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में कर दिया गया है, लेकिन आदेश जारी होने के बावजूद वे अब तक अपने पद से रिलीव नहीं हुए हैं। इससे स्थानांतरण नीति 2025 के उल्लंघन की स्थिति बन गई है।
गृह विभाग ने 30 जून को 29 अधिकारियों और कर्मचारियों के तबादले का आदेश जारी किया था, जिनमें से अधिकांश ने नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर लिया है। वहीं, वर्मा के तबादले के बावजूद उनका रिलीव न होना चर्चा का विषय बन गया है।
मिथिलेश वर्मा आबकारी घोटाले में अभियोजन अधिकारी के रूप में विवादों में रहे हैं। उन्होंने कुछ आरोपी अधिकारियों के खिलाफ बिना न्यायालय में प्रस्तुत हुए चालान स्वीकार कर लिए थे, जिस पर न्यायिक स्तर पर सवाल उठे थे।
इस बीच, ईडी और ईओडब्ल्यू द्वारा जांच किए जा रहे इस शराब घोटाले का आंकड़ा 2 हजार करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है। मामले में 2300 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और 18 जुलाई को आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई प्रस्तावित है।
स्थानांतरण नीति 2025 की धारा 7 के तहत प्रत्येक तबादले के बाद समयबद्ध रिलीविंग और कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया अनिवार्य मानी गई है। मिथिलेश वर्मा की स्थिति में इस नीति के स्पष्ट उल्लंघन के आरोप लग रहे है।




