टोकन नहीं तो सड़क नहीं खुलेगी! धान खरीदी से त्रस्त किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग किया जाम
ऑनलाइन-ऑफलाइन सब फेल, सड़क बनी आख़िरी रास्ता… धान खरीदी टोकन पर बवाल

बलरामपुर (पृथ्वीलाल केशरी)…धान खरीदी व्यवस्था में अव्यवस्था और टोकन की गंभीर समस्या से जूझ रहे किसानों का आक्रोश शुक्रवार को सड़क पर फूट पड़ा। जिले के राजपुर धान खरीदी केंद्र में टोकन नहीं मिलने से परेशान किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग–343 को जाम कर दिया, जिससे कुछ समय के लिए यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
किसानों का कहना है कि वे पिछले पंद्रह दिनों से धान बेचने के लिए टोकन कटवाने के प्रयास कर रहे हैं। खरीदी केंद्र से लेकर ऑनलाइन प्रणाली तक बार-बार कोशिश के बावजूद टोकन नहीं मिल पा रहा है। धान घरों में रखा है, लेकिन सरकारी व्यवस्था की सुस्ती किसानों को मजबूर कर रही है कि वे सड़क पर उतरकर अपनी आवाज बुलंद करें।
टोकन संकट से आक्रोशित किसानों ने पूर्व पार्षद पुरनचंद्र जायसवाल के नेतृत्व में राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्का जाम करते हुए प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों का स्पष्ट कहना था कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे धान बेचने से वंचित रह जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
चक्का जाम की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे एसडीएम देवेंद्र प्रधान ने किसानों से चर्चा की। उन्होंने माना कि राजपुर धान खरीदी केंद्र की वर्तमान खरीदी सीमा बेहद कम है। एसडीएम ने भरोसा दिलाया कि कलेक्टर बलरामपुर से चर्चा कर एक सप्ताह के भीतर खरीदी लिमिट बढ़ाने की कार्रवाई की जाएगी। आश्वासन के बाद किसानों ने चक्का जाम समाप्त किया।
गौरतलब है कि फिलहाल राजपुर धान खरीदी केंद्र की खरीदी सीमा मात्र 2000 क्विंटल निर्धारित है, जबकि क्षेत्र में धान की आवक इससे कहीं अधिक है। स्थिति यह है कि 19 जनवरी तक के टोकन पहले से ही कट चुके हैं। ऐसे में यदि खरीदी सीमा नहीं बढ़ाई गई, तो बड़ी संख्या में किसान सरकारी खरीदी से बाहर हो सकते हैं।
इस बीच चक्का जाम स्थल पर पहुंचे भाजपा प्रदेश मंत्री शिवनाथ यादव ने कहा कि सूरजपुर जिले में धान खरीदी की लिमिट पहले ही बढ़ाई जा चुकी है और जल्द ही बलरामपुर जिले में भी लिमिट बढ़ाई जाएगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में कलेक्टर से चर्चा हो चुकी है और सरकार किसानों का पूरा धान खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि सवाल यह है कि जब तक ज़मीनी स्तर पर खरीदी सीमा नहीं बढ़ती और टोकन की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक किसानों का भरोसा कैसे बहाल होगा। राजपुर की घटना ने एक बार फिर धान खरीदी व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।




