पदोन्नति पर हाईकोर्ट का फैसला: वरिष्ठता नहीं बल्कि योग्यता होगी मुख्य आधार, तुलनात्मक मूल्यांकन के बिना प्रमोशन अवैध
वर्ष 2023 में जब डीआईजी जेल के पद के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक हुई, तो समिति ने दोनों को 'बहुत अच्छा' वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) के आधार पर योग्य माना और वरिष्ठ होने के नाते 1994 बैच के अधिकारी को पदोन्नत कर दिया। इसके बाद जूनियर अधिकारी ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज निकालकर यह दावा किया कि उसकी ग्रेडिंग वरिष्ठ अधिकारी की तुलना में अधिक 'उत्कृष्ट' थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने पदोन्नति के नियमों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि ‘योग्यता-सह-वरिष्ठता’ (Merit-cum-Seniority) के सिद्धांत में उम्मीदवारों की योग्यता का तुलनात्मक मूल्यांकन करना अनिवार्य है।
अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति देना कानूनन गलत है; वरिष्ठता का लाभ केवल तब दिया जाना चाहिए जब दो उम्मीदवारों की योग्यता वास्तव में समान पाई जाए।
यह पूरा कानूनी विवाद जेल विभाग में उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर हुई पदोन्नति से शुरू हुआ। मामले के अनुसार, एक अधिकारी वर्ष 1994 में जेल अधीक्षक के पद पर नियुक्त हुआ था, जबकि दूसरा अधिकारी वर्ष 2009 में सेवा में आया।
वर्ष 2023 में जब डीआईजी जेल के पद के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक हुई, तो समिति ने दोनों को ‘बहुत अच्छा’ वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) के आधार पर योग्य माना और वरिष्ठ होने के नाते 1994 बैच के अधिकारी को पदोन्नत कर दिया। इसके बाद जूनियर अधिकारी ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत दस्तावेज निकालकर यह दावा किया कि उसकी ग्रेडिंग वरिष्ठ अधिकारी की तुलना में अधिक ‘उत्कृष्ट’ थी, जिसे नजरअंदाज कर दिया गया।
इस मामले की सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने पाया कि डीपीसी ने सभी उम्मीदवारों को केवल समान ग्रेडिंग के आधार पर बराबर मान लिया था और उनकी व्यक्तिगत योग्यता का कोई तुलनात्मक अध्ययन नहीं किया। कोर्ट ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा कि ऐसी प्रक्रिया पदोन्नति को मनमाना और अवैध बनाती है।
डिवीजन बेंच ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि पदोन्नति में योग्यता ही प्रमुख आधार होनी चाहिए और वरिष्ठता का उपयोग केवल ‘टाई-ब्रेकर’ के रूप में ही किया जा सकता है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सिंगल बेंच ने भी इस पदोन्नति आदेश को रद्द कर दिया था, जिसे वरिष्ठ अधिकारी ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी। अब मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील को खारिज कर दिया है।





