बलरामपुर… स्कूल में बच्चों को अनुशासन सिखाने के नाम पर कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वाड्रफनगर के प्रेमनगर डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में दो छात्रों के साथ मारपीट के आरोप लगे हैं। परिजनों का दावा है कि मामूली गलती के बाद दोनों बच्चों को कमरे में बंद कर स्टम्प से पीटा गया, जिससे उनकी पीठ पर चोट के निशान पड़ गए।

परिजनों के मुताबिक, घटना के बाद दोनों बच्चे सहमे हुए घर लौटे। शुरुआत में उन्होंने डर के कारण कुछ नहीं बताया। घरवालों के बार-बार पूछने पर बच्चों ने कथित तौर पर स्कूल में हुई मारपीट की जानकारी दी। बच्चों ने परिजनों को बताया कि पिटाई के बाद उन्हें घटना के बारे में घर पर किसी को बताने से मना किया गया और ऐसा करने पर गंभीर मामले में फंसाने की धमकी दी गई।

 अभिभावकों को बताते, कमरे में बंद करना क्यों?

घटना सामने आने के बाद परिजनों में नाराजगी है। उनका कहना है कि बच्चों से यदि कोई गलती हुई थी तो स्कूल प्रबंधन को इसकी जानकारी अभिभावकों को देनी चाहिए थी। बच्चों को कमरे में बंद कर शारीरिक दंड देना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। परिजनों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

मामले को लेकर स्कूल प्रबंधन की ओर से भी कार्रवाई की बात सामने आई है। प्राचार्य अंशु यादव ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित खेल प्रभारी गंगाधर को उनके पद से हटा दिया गया है।

हालांकि, केवल पद से हटाने की कार्रवाई के बाद मामला खत्म होता नहीं दिख रहा। बच्चों के परिजनों ने घटना की पूरी जांच, कथित मारपीट की परिस्थितियों और बच्चों को धमकी दिए जाने के आरोपों की भी जांच की मांग की है। अब निगाहें शिक्षा विभाग और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर हैं।

बहरहाल पालकों का कहना है कि स्कूल.. बच्चों के भविष्य की नींव रखने की जगह है, डर पैदा करने की नहीं—अब सवाल सिर्फ दो बच्चों की पीठ पर पड़े चोट के निशानों का नहीं, बल्कि यह है कि स्कूल की चारदीवारी के भीतर बच्चों की सुरक्षा और अनुशासन की सीमा आखिर कौन तय करेगा?