बिक्री समझौते से किरायेदारी खत्म नहीं हो सकती: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का फैसला

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल बिक्री समझौते (एग्रीमेंट ऑफ सेल) के आधार पर किसी किरायेदारी को समाप्त नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने मकान मालिक की याचिका स्वीकार करते हुए मामले को दोबारा सुनवाई के लिए किराया नियंत्रण न्यायाधिकरण (रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल) में भेज दिया है और दोनों पक्षों को 1 सितंबर 2025 को पेश होने का निर्देश दिया है।
मामला रायपुर का है, जहां याचिकाकर्ता मोहम्मद मकसूद ने मोहम्मद अय्यूब रज़ा को एक दुकान किराए पर दी थी।
30 जुलाई 2015 को मकान मालिक ने किरायेदारी खत्म करने का नोटिस भेजा, जो अगले दिन किरायेदार को मिल गया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद मामला रेंट कंट्रोलर के पास पहुंचा, जहां आदेश किरायेदार के पक्ष में गया।
इस फैसले को चुनौती देते हुए मकान मालिक ने 15 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ रेंट कंट्रोल ट्रिब्यूनल रायपुर के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
सुनवाई के दौरान जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की खंडपीठ ने कहा कि किरायेदारी समाप्त करने के लिए बिक्री समझौता आधार नहीं बन सकता, क्योंकि यह कानून और तथ्यों की गलत व्याख्या है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह के मामलों में सीधे सीपीसी की धारा 11 के ऑर्डर 7 के तहत निर्णय नहीं लिया जा सकता, बल्कि सबूत पेश करना आवश्यक है।





