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Budget 2026- अंतिम छोर के व्यक्ति से लेकर बड़े व्यापारियों तक, वित्त मंत्री से क्या हैं देश की बड़ी उम्मीदें?

Budget 2026-जैसे-जैसे 1 फरवरी की तारीख नजदीक आ रही है, देशभर में केंद्रीय बजट 2026 को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। यह बजट केवल सरकार के खर्चों का लेखा-जोखा नहीं है, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सपनों और जरूरतों की फेहरिस्त भी है।

इस बार बजट से समाज के हर तबके—चाहे वह सबसे निचले पायदान पर खड़ा व्यक्ति हो या फिर देश की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला व्यापारी वर्ग—सबकी निगाहें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के भाषण पर टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर बाजार के चौराहों तक केवल एक ही चर्चा है कि क्या इस बार महंगाई पर लगाम लगेगी और क्या व्यापार करने की राह आसान होगी?

Budget 2026-बजट की वैचारिक दिशा को लेकर भाजपा सांसद अतुल गर्ग का मानना है कि आगामी बजट ‘अंत्योदय’ की भावना से प्रेरित होगा। उनके अनुसार, सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता समाज के सबसे निचले तबके को सशक्त बनाना है।

पंडित दीन दयाल उपाध्याय के सिद्धांतों का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे ‘सपनों का बजट’ करार दिया है, जो पिछले दस वर्षों के विकास कार्यों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। हालांकि, सत्ता पक्ष की इन उम्मीदों के बीच जमीन पर काम कर रहे व्यापारियों की अपनी कुछ ठोस मांगें और चिंताएं भी हैं।

Budget 2026-उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से व्यापार मंडल के असीम विनोद ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया है। व्यापारियों का मानना है कि महंगाई को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी तरीका ट्रांसपोर्टेशन लागत को कम करना है, जिसके लिए पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कटौती अनिवार्य है।

Budget 2026-उन्होंने सरकार की इथेनॉल मिश्रण नीति की समीक्षा की भी मांग की है, ताकि ईंधन की कीमतों का बोझ आम जनता और व्यापारियों पर कम हो सके। इसके साथ ही, संयुक्त व्यापार मंडल के प्रदेश अध्यक्ष नीरज जिंदल ने इनकम टैक्स की छूट सीमा बढ़ाने और जीएसटी (GST) की विसंगतियों को दूर करने की पुरजोर वकालत की है। व्यापारियों का कहना है कि यदि कर प्रणाली सरल होगी, तो व्यापार फलेगा-फूलेगा, जिसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था को मिलेगा।

सिर्फ उत्तर भारत ही नहीं, बल्कि देश के बड़े व्यापारिक केंद्र सूरत से भी बजट को लेकर बड़ी मांगें उठ रही हैं। हॉस्पिटैलिटी और इवेंट इंडस्ट्री से जुड़े मिनेश नायक और दीक्षित त्रिवेदी जैसे दिग्गजों का कहना है कि होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन सेवाओं पर टैक्स की दरें कम की जानी चाहिए।

उनका तर्क है कि पर्यटन क्षेत्र रोजगार पैदा करने का एक बड़ा माध्यम है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए टीसीएस (TCS) में कमी, हवाई किराए में कटौती और शहरों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी जैसे कदम इस सेक्टर को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि सरकार इस बार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को केवल कागजों तक सीमित न रखकर धरातल पर उतारेगी।

इन सबके बीच, देश का आम नागरिक अपनी रसोई के बजट को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित है। बिहार के नवादा से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक, आम जनता की केवल एक ही बुनियादी मांग है—महंगाई से राहत।

लोगों को उम्मीद है कि बजट में खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए सस्ता राशन, सस्ती शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं ही इस बजट की असली सफलता का पैमाना होंगी। 

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