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Union budget 2026- धागे से लेकर सोने की चमक तक, क्या वित्त मंत्री पूरा करेंगी व्यापारियों का ‘ड्रीम बजट’?

बजट 2026: आम बजट पेश होने में अब बस कुछ ही घंटे बाकी हैं और उससे पहले व्यापारियों ने सरकार के सामने अपनी मांगें रख दी हैं. मेटल कारोबारी चंदन भंसाली से लेकर कपड़ा व्यापारी गणपत कोठारी तक, हर किसी को इस बार बड़ी राहत की उम्मीद है. जानिए, सराफा बाजार और MSME सेक्टर ने वित्त मंत्री से क्या खास गुहार लगाई है.

Union budget 2026/बजट 2026 की घड़ी जैसे-जैसे करीब आ रही है, संसद से लेकर सड़क तक केवल एक ही चर्चा है—इस बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे से किसके लिए क्या निकलेगा? देश का आम बजट पेश होने में अब कुछ ही समय शेष है और व्यापारिक गलियारों में हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है।

छोटे गलियों के दुकानदार हों या बड़े औद्योगिक घरानों के दिग्गज, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार उनकी जेब को राहत देने वाली है या फिर वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच उनके सामने चुनौतियों का नया पहाड़ खड़ा होने वाला है। इस बार का बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह उन करोड़ों व्यापारियों की उम्मीदों का आईना है जो भारतीय अर्थव्यवस्था के पहिये को दिन-रात गति दे रहे हैं।Union budget 2026

देश के विकास की नींव माने जाने वाले मेटल यानी धातु उद्योग को इस बजट से काफी उम्मीदें हैं। सुई से लेकर हवाई जहाज तक की निर्माण प्रक्रिया में शामिल इस सेक्टर के दिग्गजों का कहना है कि सरकार को अब नीतियों के सरलीकरण पर ध्यान देना चाहिए।

मेटल एंड स्टील मर्चेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष चंदन भंसाली का स्पष्ट मानना है कि अगर मेटल इंडस्ट्री को करों में थोड़ी भी राहत मिलती है, तो इसका सीधा फायदा आम आदमी की थाली और उसके घर के बजट तक पहुंचेगा। दरअसल, कच्चा माल सस्ता होने से उत्पादन लागत कम होगी, जो अंततः बाजार में महंगाई पर लगाम लगाने में मददगार साबित हो सकती है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सरकार इस बुनियादी क्षेत्र की मांगों को सुनकर निर्माण क्षेत्र को नई रफ्तार देती है या नहीं।Union budget 2026

सिर्फ लोहा और स्टील ही नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति और रोजगार का अहम हिस्सा रहा कपड़ा उद्योग भी इस बार सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठा है। इस सेक्टर के व्यापारियों ने एक बहुत ही तकनीकी लेकिन महत्वपूर्ण मांग सामने रखी है। कपड़ा व्यापारी गणपत कोठारी के अनुसार, इस बार ‘धागे’ (Yarn) पर लगने वाले जीएसटी के गणित को सुधारने की सख्त जरूरत है।

व्यापारियों का तर्क है कि यदि धागे पर टैक्स का बोझ कम होता है, तो न केवल भारतीय बाजार में कपड़ों की कीमतें गिरेंगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी भारत के बने कपड़े दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी होकर उभरेंगे। व्यापारियों का मानना है कि यदि सरकार नीतियों में आधुनिकता और थोड़ी नरमी लाती है, तो व्यापार का वॉल्यूम इतना बढ़ जाएगा कि सरकार का टैक्स कलेक्शन खुद-ब-खुद रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगा।

वहीं, दूसरी ओर सर्राफा बाजार की अपनी अलग ही चमक और चिंताएं हैं। भारतीय परिवारों के लिए सोना सिर्फ गहना नहीं, बल्कि संकट का सबसे भरोसेमंद साथी है।Union budget 2026

सर्राफा व्यापारी सुभाष वडाला ने बजट से उम्मीद जताई है कि सरकार को सोने-चांदी की खरीद-बिक्री को प्रोत्साहित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उनका मानना है कि जब सर्राफा बाजार में खरीदारी का माहौल बनता है, तो बाजार में नकदी का प्रवाह तेज होता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था को संजीवनी मिलती है। इसके साथ ही, देश की इकोनॉमी का ‘ग्रोथ इंजन’ कहे जाने वाले MSME यानी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ने भी अपनी आवाज बुलंद कर दी है।

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