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Bilaspur

यूडाइस हेरफेर पर क्यों खामोश है शिक्षा विभाग? जवाबदेही से बचता तंत्र

नारायण टेक्नोक्रेट्स का यूडाइस खेल: डाटा में गड़बड़ी के आरोपों ने खोली परतें, 8वीं तक मान्यता के बीच 12वीं का प्रचार भी घेरे में

बिलासपुर…नारायण टेक्नोक्रेट्स स्कूल से जुड़ा विवाद अब सिर्फ मान्यता या परीक्षा पद्धति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरा मामला  UDISE+ डाटा में कथित हेरफेर के इर्द-गिर्द सिमटता नजर आ रहा है। यही वह बिंदु है, जिसने इस प्रकरण को सामान्य अनियमितता से उठाकर गंभीर प्रशासनिक जांच के दायरे में ला खड़ा किया है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार बिलासपुर शाखा से 57 छात्रों के लिए रोल नंबर जारी किए गए, लेकिन परीक्षा के दौरान 28 छात्र अनुपस्थित दर्ज हुए। चौंकाने वाली बात यह रही कि यही छात्र रायपुर स्थित शाखा में परीक्षा देते पाए गए। इससे यह संदेह गहरा हुआ कि छात्रों का वास्तविक स्थान और पंजीयन विवरण यूडाइस डाटा में अलग-अलग तरीके से दर्ज किया गया। आरोप यह भी है कि रायपुर के लगभग 250 छात्रों को बिलासपुर के यूडाइस कोड पर पंजीकृत किया गया, जो यदि सही साबित होता है तो यह डाटा प्रबंधन नहीं बल्कि सुनियोजित हेरफेर का मामला बन सकता है।

यूडाइस, जो देशभर में स्कूलों के नामांकन, संसाधन और परीक्षा से जुड़े आंकड़ों का आधार माना जाता है, उसमें इस तरह की विसंगति सीधे तौर पर पूरी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करती है। यही कारण है कि अब इस प्रकरण का केंद्र बिंदु केवल स्कूल प्रबंधन नहीं, बल्कि डाटा की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र बन गया है।

इसी के समानांतर स्कूल की मान्यता और संचालन को लेकर भी गंभीर विरोधाभास सामने आए हैं। दस्तावेज बताते हैं कि संस्थान को केवल नर्सरी से कक्षा 8वीं तक संचालन की अनुमति मिली है, लेकिन प्रबंधन द्वारा 12वीं तक सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन  से संबद्धता का प्रचार किया गया। पूरे सत्र में पढ़ाई सीबीएसई पैटर्न पर कराई गई, जबकि कक्षा 5वीं और 8वीं के छात्रों को छत्तीसगढ़ बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन की परीक्षा में शामिल कराया गया। यह दोहरी व्यवस्था अब यूडाइस डाटा में सामने आई विसंगतियों के साथ मिलकर और अधिक गंभीर प्रतीत हो रही है।

अभिभावकों के आरोप केवल डाटा या बोर्ड तक सीमित नहीं हैं। उनका कहना है कि छात्रों को अलग-अलग पैटर्न के बीच उलझाकर न केवल शैक्षणिक भ्रम पैदा किया गया, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ाया गया। निजी प्रकाशकों की किताबें ऊंचे दामों पर उपलब्ध कराए जाने और वार्षिक परीक्षा के बाद दोबारा बोर्ड परीक्षा में बैठाने जैसे आरोपों ने इस असंतोष को और गहरा किया है।

जांच प्रक्रिया भी अब सवालों के घेरे में है। जिला शिक्षा अधिकारी स्तर की जांच में प्रबंधन को राहत मिलने की चर्चा है, जबकि जॉइंट डायरेक्टर की रिपोर्ट अभी लंबित है। ऐसे में यूडाइस डाटा से जुड़े आरोपों के बीच किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में दी गई क्लीन चिट जांच की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े कर रही है।

जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे ने स्पष्ट किया है कि अनुपस्थित छात्रों और रायपुर में परीक्षा देने के मामले की अलग से जांच कराई जाएगी। संबंधित बीईओ से रिपोर्ट मंगाई जा रही है और किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इधर विष्णुदेव राय ने निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त रुख जताया है। अभिभावक अब इस पूरे मामले की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचाने की तैयारी में हैं।

पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल केंद्र में ला दिया है कि क्या यूडाइस जैसे महत्वपूर्ण डाटा सिस्टम का इस्तेमाल पारदर्शिता के बजाय हेरफेर के लिए किया जा रहा है, और यदि ऐसा है तो इसकी जिम्मेदारी सिर्फ एक संस्थान की नहीं, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की होगी।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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