नक्सल नेटवर्क को बड़ा झटका: 108 माओवादियों का सामूहिक सरेंडर
44 महिलाएं और 64 पुरुष शामिल, 3.95 करोड़ का इनाम घोषित था

जगदलपुर…बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच बुधवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया। दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी से जुड़े 108 माओवादी कैडरों ने जगदलपुर में सामूहिक रूप से आत्मसमर्पण किया। इनमें 44 महिलाएं और 64 पुरुष शामिल हैं। इन सभी पर मिलाकर करीब 3.95 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
छह जिलों से जुड़े कैडर
आत्मसमर्पण करने वाले माओवादी बस्तर के अलग-अलग इलाकों में सक्रिय रहे थे। इनमें बीजापुर से 37, दंतेवाड़ा से 30, सुकमा से 18, बस्तर से 16, नारायणपुर से 4 और कांकेर से 3 कैडर शामिल हैं।
अब तक की सबसे बड़ी डंप बरामदगी
आत्मसमर्पण के बाद कैडरों की निशानदेही पर सुरक्षा बलों को बड़ी मात्रा में हथियार और अन्य सामग्री मिली है। अधिकारियों के अनुसार यह नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास की सबसे बड़ी डंप बरामदगी मानी जा रही है।
इस अभियान में छत्तीसगढ़ पुलिस, CRPF और कोबरा यूनिट सहित विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की।
“पूना मारगेम” पहल का असर
यह सामूहिक सरेंडर “पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के तहत हुआ है। इस पहल के माध्यम से नक्सल गतिविधियों से जुड़े लोगों को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। पुनर्वास नीति के तहत उन्हें रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक पुनर्स्थापन से जुड़ी सुविधाएं दी जाती हैं।
बदलती तस्वीर का संकेत
बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने इसे क्षेत्र की बदलती तस्वीर का संकेत बताया। उनका कहना है कि यह पहल केवल हथियार छुड़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भटके युवाओं को सम्मानजनक जीवन की ओर लौटाने का प्रयास है।
नक्सल मुक्त भारत लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम
केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद के प्रभाव को निर्णायक रूप से कम करने का लक्ष्य तय किया है। उससे पहले 108 माओवादियों का सामूहिक आत्मसमर्पण सुरक्षा एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के सरेंडर नक्सल संगठनों की संगठनात्मक और आर्थिक क्षमता पर सीधा असर डालते हैं l





