हजारों क्विंटल घटिया चावल ‘लाट पास’ का खेल : नान गोदाम में राज्य स्तरीय जांच
डीएम सहित 8 कर्मचारियों को नोटिस, मुख्यालय के अफसर भी रडार पर

कोरबा…राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) के कोरबा और कटघोरा गोदामों में हजारों क्विंटल कथित घटिया चावल लाट पास किए जाने का मामला अब तूल पकड़ चुका है। राज्य स्तर की जांच समिति ने प्रारंभिक पड़ताल शुरू कर दी है। जांच पूरी होने के बाद कई बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
मुख्यालय से गठित समिति ने गोदामों का शुरुआती निरीक्षण किया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत तकनीकी और प्रशासनिक जांच की जा रही है।
आईडी–पासवर्ड के दुरुपयोग से लाट पास?
सूत्रों के अनुसार अन्य जिलों के तकनीकी कर्मचारियों की आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल कर चावल के लाट स्वीकार किए गए। यदि यह तथ्य पुष्ट होता है तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता, बल्कि डिजिटल सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल होगा।
कोरबा जिला प्रबंधक सहित 8 कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है, लेकिन जिला प्रबंधकों की भूमिका को लेकर अब तक स्पष्ट स्थिति सामने नहीं आई है।
गुणवत्ता के बिना कैसे पास हुए लाट?
नियम के अनुसार जिस जिले में गुणवत्ता निरीक्षक पदस्थ होता है, वही चावल की जांच कर दस्तावेज तैयार करता है। मुख्यालय के लिखित आदेश के बिना न तो आईडी ट्रांसफर हो सकती है और न ही किसी अन्य जिले में लाट का पेपर तैयार किया जा सकता है।
इसके बावजूद दो जिलों में बिना स्पष्ट आदेश के आईडी ट्रांसफर और लाट पास होने की बात सामने आ रही है। यह प्रक्रिया स्वयं में संदेह पैदा करती है।
एक दिन में 15 लाट की क्षमता, किसने पास किए?
जानकारी के अनुसार कोरबा में पदस्थ नियमित तकनीकी कर्मचारी से केवल एक लाट पास कराया गया, जबकि नियम अनुसार एक तकनीकी कर्मी प्रतिदिन अधिकतम 15 लाट पास कर सकता है। शेष लाट किसके माध्यम से और किस आधार पर स्वीकृत हुए — यही जांच का मुख्य बिंदु है।
मुख्यालय में यह भी चर्चा है कि जिस अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच लंबित है, उसे जिले में जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई?
एफएसएसएआई को भेजे गए सैंपल
नान द्वारा चावल के सैंपल जांच के लिए एफएसएसएआई को भेजे गए हैं। जबकि प्रावधान अनुसार इस प्रकार की गुणवत्ता जांच भारत सरकार की केंद्रीय अनाज विश्लेषण प्रयोगशाला में कराई जानी चाहिए थी। इससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी प्रश्न उठ रहे हैं।
पहले भी उठे थे सवाल, नहीं हुई कार्रवाई
गत माह सरकारी राशन दुकानों में कथित रूप से जानवरों के खाने लायक भी न होने वाले चावल के वितरण को लेकर खबरें सामने आई थीं। मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में लाया गया, लेकिन उस समय कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
अब जब राज्य स्तर पर जांच बैठी है, तो सवाल यह है कि क्या यह केवल औपचारिकता होगी या वास्तव में जिम्मेदारों तक कार्रवाई पहुंचेगी?
चौंकाने वाले खुलासों के संकेत
मुख्यालय से उपमहाप्रबंधक और एक तकनीकी अधिकारी को राज्य स्तरीय समिति में शामिल किया गया है। सूत्र दावा कर रहे हैं कि जांच के बाद कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।
हजारों क्विंटल चावल का मामला सिर्फ कागजी अनियमितता नहीं है — यह सीधे गरीबों की थाली से जुड़ा प्रश्न है। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि कार्रवाई निचले कर्मचारियों तक सीमित रहती है या जिम्मेदारी तय कर उच्च स्तर तक पहुंचती है।





