सत्ता की छाया में ‘सुरक्षित’ आरोपी? भाजपा पार्षद पति पर दुष्कर्म का केस, 15 दिन बाद भी गिरफ्तारी नहीं
एफआईआर दर्ज, 15 दिन बीते… सत्ता से जुड़े आरोपी तक क्यों नहीं पहुंची हथकड़ी?

बिलासपुर। सकरी थाना क्षेत्र में दर्ज एक दुष्कर्म प्रकरण ने पुलिस की कार्यप्रणाली और सत्ता से जुड़े प्रभाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भाजपा की एक महिला पार्षद के पति के खिलाफ 32 वर्षीय महिला ने दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। लेकिन मामला दर्ज होने के 15 दिन बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़िता का आरोप: गैरमौजूदगी में वारदात
पीड़िता के अनुसार, घटना उस समय की है जब उसका पति घर से बाहर था। इसी दौरान उसलापुर क्षेत्र से जुड़े पार्षद पति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पति के लौटने पर महिला ने पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद दंपती ने सकरी थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई।
गिरफ्तारी टली, पुलिस की चुप्पी पर सवाल
एफआईआर दर्ज हुए दो सप्ताह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आरोपी अब तक पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। इस देरी को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज है। विपक्षी स्वर यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या राजनीतिक प्रभाव के कारण कार्रवाई धीमी है? हालांकि पुलिस की ओर से अब तक गिरफ्तारी में देरी पर स्पष्ट सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
दबाव और धमकी का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि केस वापस लेने के लिए उस पर दबाव बनाया जा रहा है। उसने यह भी कहा कि आरोपी की ओर से अप्रत्यक्ष रूप से धमकियां दी जा रही हैं। महिला का दावा है कि सत्ता से जुड़े होने के कारण आरोपी को संरक्षण मिल रहा है, जिससे गिरफ्तारी की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
न्याय बनाम प्रभाव की परीक्षा
मामले ने यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या कानून सभी के लिए समान रूप से लागू हो रहा है? दुष्कर्म जैसे गंभीर अपराध में त्वरित कार्रवाई अपेक्षित मानी जाती है। ऐसे में गिरफ्तारी में हो रही देरी ने पीड़िता और उसके परिवार में आक्रोश पैदा कर दिया है।





