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Bilaspur

कागज़ों में नल, ज़मीन पर सूखा — जल जीवन मिशन पर हाई कोर्ट सख्त..कहा..अफसरों की जवाबदेही तय होगीं

बिलासपुर… जल जीवन मिशन की जमीनी स्थिति पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि अब केवल दावों से काम नहीं चलेगा। स्वत: संज्ञान जनहित याचिका की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने कहा कि योजना में लापरवाही और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

वित्तीय देरी पर अदालत की चिंता

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से बताया गया कि मिशन के लिए निर्धारित 50 प्रतिशत केंद्रीय राशि अब तक जारी नहीं हो सकी है। इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि धन की प्रक्रिया में देरी का खामियाजा जनता को नहीं भुगतना चाहिए और आवश्यक वित्तीय औपचारिकताएं शीघ्र पूरी की जाएं।

जमीनी हकीकत पर सवाल

अदालत में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार बिलासपुर जिले के 33 गांवों और कई स्कूलों में अब भी नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हो सकी है। दैहानपारा गांव में मात्र लगभग 20 प्रतिशत घरों तक पानी पहुंचने की जानकारी दी गई। वहीं बन्नाकडीह पंचायत में राशन कार्ड के आधार पर जल कनेक्शन देने से इनकार की शिकायत सामने आई, जिसे लेकर अदालत ने असंतोष व्यक्त किया।

शुल्क वसूली में असमानता

अलग-अलग गांवों में 80 से 100 रुपये तक जल शुल्क वसूले जाने और बिलिंग में एकरूपता के अभाव का मुद्दा भी सुनवाई में उठा। अदालत ने पारदर्शिता और समान मानक सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

30 अप्रैल को अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने मामले की निगरानी जारी रखने के संकेत दिए हैं। अगली सुनवाई 30 अप्रैल को होगी, जहां प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।

 लक्ष्य और वास्तविकता के बीच दूरी

जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर ग्रामीण घर तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है। कागजों में पाइपलाइन बिछने और कनेक्शन दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन कई गांवों और स्कूलों में नियमित आपूर्ति नहीं होना योजना की वास्तविक प्रगति पर प्रश्न खड़े करता है।

वित्तीय अंशदान में देरी, स्थानीय स्तर पर शुल्क वसूली में असमानता और पात्रता को लेकर उत्पन्न विवाद यह दर्शाते हैं कि मिशन का क्रियान्वयन अभी भी कई प्रशासनिक चुनौतियों से घिरा है। हाई कोर्ट की सख्ती ने अब इस योजना को न्यायिक निगरानी के दायरे में ला दिया है, जिससे आने वाले समय में जवाबदेही तय होना तय माना जा रहा है।

Bhaskar Mishra

पत्रकारिता के क्षेत्र में लगभग 16 साल का अनुभव।विभिन्न माध्यमों से पत्रकारिता के क्षेत्र मे काम करने का अवसर मिला।यह प्रयोग अब भी जारी है।कॉलेज लाइफ के दौरान से पत्रकारिता से गहरा जुड़ाव हुआ।इसी दौरान दैनिक समय से जुडने का अवसर मिला।कहानी,कविता में विशेष दिलचस्पी ने पहले तो अधकचरा पत्रकार बनाया बाद में प्रदेश के वरिष्ठ और प्रणम्य लोगों के मार्गदर्शन में संपूर्ण पत्रकारिता की शिक्षा मिली। बिलासपुर में डिग्री लेने के दौरान दैनिक भास्कर से जु़ड़ा।2005-08 मे दैनिक हरिभूमि में उप संपादकीय कार्य किया।टूडे न्यूज,देशबन्धु और नवभारत के लिए रिपोर्टिंग की।2008- 11 के बीच ईटीवी हैदराबाद में संपादकीय कार्य को अंजाम दिया।भाग दौड़ के दौरान अन्य चैनलों से भी जुडने का अवसर मिला।2011-13 मे बिलासपुर के स्थानीय चैनल ग्रैण्ड न्यूज में संपादन का कार्य किया।2013 से 15 तक राष्ट्रीय न्यूज एक्सप्रेस चैनल में बिलासपुर संभाग व्यूरो चीफ के जिम्मेदारियों को निभाया। 1998-2000 के बीच आकाशवाणी में एनाउँसर-कम-कम्पियर का काम किया।वर्तमान में www.cgwall.com वेबपोर्टल में संपादकीय कार्य कर रहा हूं।
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