भारतमाला घोटाले में बड़ा ब्रेकथ्रू: राजस्व तंत्र की ऊंची कुर्सियों तक पहुंची जांच
करोड़ों के मुआवजे पर घोटाले की परतें खुलीं, दो बड़े अफसर रिमांड पर

रायपुर… भारतमाला परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण में कथित करोड़ों रुपये के मुआवजा घोटाले में जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्व प्रशासन के दो वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। लंबे समय से जांच से बच रहे तत्कालीन तहसीलदार शशिकांत कुर्रे और तत्कालीन नायब तहसीलदार अब आर्थिक अपराध शाखा (EOW) और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की रिमांड पर हैं।
विशेष अदालत से मिली पुलिस कस्टडी
गिरफ्तारी के बाद दोनों अधिकारियों को विशेष न्यायालय में पेश किया गया। जांच एजेंसी ने दस्तावेजों की बरामदगी, वित्तीय लेन-देन की पड़ताल और नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के लिए पुलिस रिमांड की मांग की। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्हें रिमांड पर भेज दिया।
मुआवजा वितरण में गड़बड़ी के आरोप
जांच के दायरे में भारतमाला परियोजना के दौरान अधिग्रहित जमीनों का मुआवजा वितरण है। आरोप है कि राजस्व रिकॉर्ड में हेरफेर कर अपात्र व्यक्तियों को करोड़ों रुपये का मुआवजा दिलाया गया। निजी और शासकीय भूमि के दस्तावेजों में बदलाव कर लाभ पहुंचाने का खेल खेला गया।
इस मामले में पहले भी पटवारी और कथित बिचौलिए गिरफ्तार हो चुके हैं। अब राजस्व प्रशासन के उच्च स्तर तक गिरफ्तारी पहुंचना जांच की दिशा और गंभीरता दोनों को दर्शाता है।
फरारी के बाद गिरफ्तारी
मामला दर्ज होने के बाद दोनों अधिकारी कथित रूप से जांच से दूर थे। EOW की टीम लगातार संभावित ठिकानों पर नजर रखे हुए थी। तकनीकी साक्ष्य और मुखबिरों की सूचना के आधार पर अंततः उन्हें हिरासत में लिया गया।
यह कार्रवाई संकेत देती है कि भारतमाला परियोजना के नाम पर हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं की परतें अभी और खुल सकती हैं। जांच एजेंसियां अब यह जानने में जुटी हैं कि मुआवजे के इस खेल में और कौन-कौन शामिल था तथा कितनी राशि संदिग्ध तरीके से वितरित हुई।





