“भ्रष्टाचार पर आर-पार” : शिक्षा विभाग पर अंकित गौरहा का हमला, कोर्ट तक जाने की चेतावनी
अनुकंपा नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप, डीपीआई और न्यायालय की राह पर कांग्रेस नेता

बिलासपुर…जिला शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति प्रक्रियाओं को लेकर उठे सवाल अब सियासी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर गूंजने लगे हैं। कांग्रेस नेता अंकित गौरहा ने संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग बिलासपुर को विस्तृत शिकायत भेजकर पूरे मामले की उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि यदि निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे डीपी से शिकायत करेंगे और आवश्यकता पड़ी तो न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाएंगे।
उठी चिंगारी, अब औपचारिक शिकायत
16 जनवरी 2026 को आयोजित दिशा बैठक में, केंद्रीय मंत्री तोखन साहू की उपस्थिति में जिला शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। आरोप है कि अनुकंपा नियुक्ति और प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई तथा कथित अवैध लेन-देन की शिकायतें भी सामने आईं।
अंकित गौरहा का कहना है कि शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रक्रियाओं को मनमाने ढंग से संचालित किया गया, जिससे पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा है।
विभागीय बाबू और अधिकारी की भूमिका
शिकायत में शिक्षा विभाग के एक बाबू और जिला शिक्षा अधिकारी विजय टांडे की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाया गया है कि अनुकंपा नियुक्तियों में नियमों का पालन नहीं किया गया। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं, तो यह केवल प्रक्रियात्मक त्रुटि नहीं बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला होगा।
जांच प्रक्रिया भी विवादों में
दिशा बैठक के बाद कलेक्टर द्वारा जांच के आदेश दिए गए, लेकिन जांच की जिम्मेदारी उसी विभागीय ढांचे के भीतर सौंपे जाने पर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता का तर्क है कि जब आरोप विभागीय स्तर पर हैं, तो अधीनस्थ अधिकारियों द्वारा की जा रही जांच निष्पक्ष कैसे मानी जाए?
अंकित गौरहा ने स्पष्ट कहा है कि “आरोपी अधिकारी के अधीनस्थों से जांच कराना न्याय के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।”
संभाग स्तर पर स्वतंत्र जांच की मांग
पत्र में मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की जांच संयुक्त संचालक या संभाग स्तर से नामित किसी वरिष्ठ अधिकारी की निगरानी में कराई जाए। शिकायत के साथ पूर्व पत्राचार और संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं।
गौरहा ने कहा, “भ्रष्टाचार को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि प्रशासन ने निष्पक्ष जांच नहीं कराई तो हम डीपी से शिकायत करेंगे और जरूरत पड़ी तो कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाएंगे।”
शिक्षा तंत्र की साख दांव पर
अनुकंपा नियुक्ति संवेदनशील प्रक्रिया है, जो दिवंगत कर्मचारियों के परिवारों को राहत देने के लिए बनाई गई है। यदि इसमें गड़बड़ी हुई है, तो यह केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि व्यवस्था के नैतिक आधार पर चोट है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि शिक्षा संभाग और जिला प्रशासन इस शिकायत पर क्या रुख अपनाते हैं—क्या पारदर्शी जांच होगी या मामला फाइलों में दब जाएगा?





