कलेक्टर संजय अग्रवाल बोले— “परीक्षा तीन घंटे की, जिंदगी उससे कहीं बड़ी” | 37 हजार विद्यार्थियों को दिया डर पर जीत का मंत्र
“डर के पार ही जीत है” — बिलासपुर में 37 हजार विद्यार्थियों को मिला हौसले का संकल्प

बिलासपुर… बोर्ड परीक्षाओं की दहलीज पर खड़े हजारों विद्यार्थियों के चेहरे पर घबराहट थी, लेकिन प्रशासन ने इस बार आंकड़ों से पहले आत्मविश्वास को प्राथमिकता दी। “हम होंगे कामयाब” कार्यक्रम के तहत आयोजित परीक्षा पर चर्चा में कलेक्टर संजय अग्रवाल ने सीधे विद्यार्थियों से संवाद कर उनके मन का बोझ हल्का करने की कोशिश की। जिला प्रशासन, यूनिसेफ और छत्तीसगढ़ अग्रिकॉन समिति के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में जिलेभर के स्कूलों से बच्चे ऑनलाइन जुड़े।
जिले के लगभग 37 हजार विद्यार्थी इस वर्ष दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। 20 और 21 फरवरी से शुरू हो रही इन परीक्षाओं को लेकर छात्रों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मंच से नहीं, बल्कि संवाद के जरिए दिया गया।
डर नहीं, धैर्य आपका साथी बने
कलेक्टर ने विद्यार्थियों से कहा कि परीक्षा सालभर की मेहनत का मूल्यांकन है, लेकिन जीवन का अंतिम फैसला नहीं। जिन विद्यार्थियों ने नियमित अध्ययन किया है, उन्हें चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। और जिन्हें तैयारी में कमी महसूस हो रही है, वे घबराने के बजाय संयम से पढ़ाई करें, मजबूत विषयों को प्राथमिकता दें और नियमित रीविजन करें।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा—परीक्षा के तीन घंटे जीवन की पूरी कहानी नहीं लिखते। असफलता अंत नहीं, बल्कि नए प्रयास की शुरुआत होती है।
उदाहरणों से बढ़ाया मनोबल
संवाद के दौरान कलेक्टर ने सचिन तेंदुलकर, थॉमस एडिसन, धीरूभाई अंबानी, स्टीव जॉब्स और कपिल शर्मा जैसे व्यक्तित्वों का उल्लेख करते हुए समझाया कि परंपरागत शिक्षा ही सफलता का एकमात्र रास्ता नहीं है। आत्मविश्वास, निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच से ही व्यक्ति अपनी पहचान बनाता है।
यह संदेश केवल प्रेरणा नहीं था, बल्कि उन विद्यार्थियों के लिए राहत था जो परिणाम को लेकर दबाव में हैं।
पढ़ाई के साथ संतुलित दिनचर्या पर जोर
कलेक्टर ने बच्चों को रोज कम से कम 40 मिनट शारीरिक व्यायाम करने, सकारात्मक मित्र मंडली बनाने और समूह चर्चा के माध्यम से अध्ययन करने की सलाह दी। उनका कहना था कि चर्चा के जरिए पढ़ी गई सामग्री लंबे समय तक याद रहती है और कठिन विषयों पर पकड़ मजबूत होती है।
गैजेट्स से दूरी, समय प्रबंधन और मानसिक एकाग्रता पर विद्यार्थियों ने सवाल किए, जिनका जवाब सरल और व्यावहारिक सुझावों के साथ दिया गया। माहौल औपचारिक कम और आत्मीय अधिक दिखा।
प्रशासन की अपील—तनाव नहीं, तैयारी पर ध्यान
सीईओ जिला पंचायत संदीप अग्रवाल ने विद्यार्थियों से पर्याप्त नींद लेने, अनावश्यक तनाव से बचने और मानसिक शांति बनाए रखने की अपील की। उनका कहना था कि संतुलित दिनचर्या और सकारात्मक सोच ही बेहतर परिणाम का आधार है।
कार्यक्रम में अपर कलेक्टर शिव कुमार बनर्जी और समग्र शिक्षा के जिला मिशन समन्वयक ओम पांडे भी उपस्थित रहे।
एक संदेश जो आंकड़ों से बड़ा है
बोर्ड परीक्षा हर साल आती है, लेकिन इस बार प्रशासन ने परिणाम से पहले मनोबल को प्राथमिकता दी। जब 37 हजार विद्यार्थी परीक्षा हॉल में बैठेंगे, तो उनके साथ केवल प्रश्नपत्र नहीं, बल्कि यह विश्वास भी होगा कि तीन घंटे उनका भविष्य तय नहीं करते—उनकी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास करते हैं।





