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Internet Safety School Curriculum: डिजिटल युग में सुरक्षा की मांग, 56 फीसदी अभिभावक और शिक्षक चाहते हैं स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो इंटरनेट सेफ्टी

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब हाल ही में 'सेफर इंटरनेट डे' (फरवरी 2026) के अवसर पर विशेषज्ञों ने स्कूलों और सरकारों से डिजिटल सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने की अपील की है।

Internet Safety School Curriculum।दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तेजी से बदलते डिजिटल परिवेश के बीच बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी चिंता सामने आई है।

हाल ही में जारी एक सर्वेक्षण के अनुसार, देश के 56 प्रतिशत से अधिक अभिभावक और शिक्षक अब इंटरनेट सुरक्षा को स्कूलों के मुख्य पाठ्यक्रम (Core Curriculum) का हिस्सा बनाने के पक्ष में हैं। उनका मानना है कि बढ़ते ऑनलाइन खतरों और हानिकारक कंटेंट से बच्चों को बचाने के लिए अब यह केवल विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य आवश्यकता बन गई है।

​यह सर्वेक्षण ‘सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल’ द्वारा किया गया, जिसमें 1,800 अभिभावकों और 300 शिक्षकों की राय ली गई। रिपोर्ट के नतीजे बताते हैं कि एआई के युग में युवाओं के सीखने और सामाजिक जुड़ाव के तरीके पूरी तरह बदल गए हैं, जिससे वे नई तरह की डिजिटल चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।

​पाठ्यक्रम में कैसे शामिल हो सुरक्षा शिक्षा?Internet Safety School Curriculum

​सर्वेक्षण में शामिल प्रतिभागियों ने इंटरनेट सुरक्षा को पढ़ाने के तरीकों पर अलग-अलग सुझाव दिए हैं:

  • नियमित विषय: 32 प्रतिशत प्रतिभागियों का मानना है कि इंटरनेट सुरक्षा को एक अलग विषय के रूप में सप्ताह में नियमित कक्षाओं के साथ पढ़ाया जाना चाहिए।
  • एकीकृत शिक्षा: 24 प्रतिशत लोगों ने सुझाव दिया कि इसे कंप्यूटर अध्ययन (Computer Science) जैसे मौजूदा विषयों के साथ जोड़कर पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए।

​अभिभावकों और शिक्षकों की मुख्य चिंताएं

​डिजिटल दुनिया में बच्चों को लेकर सबसे बड़ी चिंताएं साइबर अपराधों और व्यवहारिक बदलावों से जुड़ी हैं:

  • साइबरबुलिंग: 34 प्रतिशत लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता साइबरबुलिंग को रोकना और इसकी सही समय पर जानकारी देना है।
  • अनुचित कंटेंट: 29 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने अश्लील या अनुचित विषय वस्तु और ऑनलाइन ठगों (Predators) से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
  • गोपनीयता और डेटा: 22 प्रतिशत ने व्यक्तिगत जानकारी को जिम्मेदारी से साझा करने और प्राइवेसी की सुरक्षा को जरूरी बताया।
  • डिजिटल लत: 15 प्रतिशत प्रतिभागी बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम और डिजिटल लत को लेकर चिंतित हैं।

​’अनिवार्य साक्षरता’ बन गई है ऑनलाइन सुरक्षा।Internet Safety School Curriculum

​सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल के उपाध्यक्ष नमन जैन ने सर्वेक्षण के नतीजों को एक चेतावनी बताते हुए कहा, “आज के छात्र जिस डिजिटल दुनिया में रह रहे हैं, वह हमारे बचपन से बिल्कुल अलग है। एआई इंटरनेट के हर पहलू को नया रूप दे रहा है, ऐसे में ऑनलाइन सुरक्षा अब कोई अतिरिक्त विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य साक्षरता है।”

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