जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शिक्षा को लेकर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सदन में किया सवाल

रायपुर।लोकसभा में छत्तीसगढ़ के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शिक्षा को लेकर उठे सवाल से राज्य से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई है। प्रदेश के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री और रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सांसद में निपुण भारत मिशन के तहत मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक कौशल की प्रगति, भाषाई बाधाओं और डिजिटल संसाधनों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से सवाल पूछा था।
सदन में दिए गए उत्तर में शिक्षा मंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ के दूरस्थ आदिवासी इलाकों में अब 18 स्थानीय भाषाओं और बोलियों में प्राथमिक शिक्षा दी जा रही है। सरकार के अनुसार, मातृभाषा आधारित बहुभाषी शिक्षण मॉडल अपनाए जाने से बच्चों की सीखने की गति में सुधार हुआ है और स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति में भी कमी आई है।
इस सवाल का सीधा लाभ यह रहा कि केंद्र सरकार को लोकसभा के पटल पर छत्तीसगढ़ के लिए स्वीकृत संसाधनों का विवरण देना पड़ा। जवाब में बताया गया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत राज्य में 10,771 स्मार्ट कक्षाओं को मंजूरी दी गई है और स्थानीय भाषाओं में डिजिटल एफएलएन सामग्री का विकास किया जा रहा है।
परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 के आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार ने बताया कि बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक कौशल के स्तर पर सुधार दर्ज किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों के कक्षा तीन के विद्यार्थियों का प्रदर्शन कई मामलों में शहरी और निजी स्कूलों से बेहतर रहा है।
राजनीतिक दृष्टि से यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसे प्रदेश के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री ने उठाया। सदन में मिले जवाब से यह साफ हुआ कि 2026-27 तक सार्वभौमिक एफएलएन लक्ष्य हासिल करने के लिए जनजातीय और पिछड़े क्षेत्रों पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
बाद में बृजमोहन अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर कहा कि निपुण भारत मिशन केवल साक्षरता का अभियान नहीं, बल्कि जनजातीय समाज को उसकी भाषा और संस्कृति के साथ शिक्षा से जोड़ने का प्रयास है। उनके अनुसार, लोकसभा में उठा यह सवाल छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों के लिए नीतिगत और संसाधन दोनों स्तर पर लाभकारी साबित होगा।





